सतीश चंद शुक्ला (सत्पथी)
जौनपुर। जनपद के विभिन्न विकास खण्डों के गांवों में करायें जाने वाले कार्य बगैर अखबारों में टेण्डर प्रकाशित कराये न कराये जाने का सरकारी आदेश है जिसके निमित्त ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी/ ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा विभिन्न अखबारों में ग्राम सभाओं में होने वाले कार्य का विधिवत टेंडर प्रकाशित कराया जाता है टेंडर प्रकाशित करने के बाद ही गांव सभा में कार्य की शुरुआत की जाती है लेकिन जिन अखबार वालों को माध्यम बनाकर ग्राम विकास अधिकारियों/ ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा अपने कार्यो में पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाई जाती है उन्हीं अखबारों के टेण्डर छपाई का भुगतान सम्बन्धित अखबारों को किये जाने में ग्राम पंचायत अधिकारियों/ ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भी निरन्तर हीला हवाली किया जाता है परिणामत:अधिकांश अखबारों का भुगतान पिछले 3-4सालों से नहीं हो पाया जिसके लिए तमाम अखबारों के प्रतिनिधियों ने अनेकों बार मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाड़िया से शिकायत भी दर्ज कराया।
आश्चर्यजनक तो यह है कि कभी डीपीआरओ कभी डीसी मनरेगा कभी डीडीओ कभी डीसी डीएलारसी तो कभी परियोजना निदेशक को होने वाले मुख्य विकास अधिकारी महोदय का यह आदेश सिर्फ हवा-हवाई और कागजी खानापूर्ति ही साबित हुआ किसी भी ब्लाक से प्रेस के लम्बित देयकों का एक भी भुगतान अब तक नहीं किया जा सका सर्वाधिक मामला तो बदलापुर विकास खण्ड के दुर्गेश तिवारी जी का है आम जनमानस में यह अवधारणा काफी चर्चित और आम इस मायने में मानी जाती है कि अत्यन्त मृदुभाषी श्री तिवारी की गिनती विधायक बदलापुर रमेश मिश्र के करीबियों में की जाती है जाहिर है कि विधायक के करीबी होने से मुख्य विकास अधिकारी का आदेश इनपर बेअसर होता हो ।कमोवेश हर ब्लाकों की यह खुली सच्चाई है कि जितना बेलगामी बेकद्री अपने उच्चाधिकारियों की इस विभाग में है उतना शायद कहीं नहीं। यह वर्तमान सरकार की नीतियों पर क़रारा प्रहार है ।लोगों का मानना है कि सपा राज में भी उक्त व्यक्ति काबीना मंत्री/विधायक ललई यादव का भी करीबी बना हुआ था ।












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