खेल, शिक्षा और नवाचार सफलता के तीन स्तंभ : कुलपति

Share

राष्ट्रीय खेल दिवस पर पीयू में मनाई गयी मेजर ध्यानचन्द जयंती

इंडौर स्टेडियम में हुए कई खेलों के आयोजन,

कुलपति जी खुद उतरे बैडमिंटन कोर्ट पर

कुलपति का आह्वान—रोज एक घंटा खेल के मैदान में बिताएं विद्यार्थी

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मेजर ध्यानचन्द क्रीड़ा संकुल में शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचन्द की जयंती उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने मेजर ध्यानचन्द के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को खेल को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की शपथ दिलाई।

कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा, शोध और नवाचार के साथ खेल भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उतने ही आवश्यक हैं। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है और स्वस्थ मस्तिष्क ही सृजनात्मक सोच, शोध एवं नवाचार को नई दिशा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कम से कम एक घंटा खेल के मैदान में बिताएं और फिट इंडिया के उद्देश्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण सिखाने वाली जीवनशैली है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं खेलों से जुड़ने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी खेल एवं योगाभ्यास के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

कुलपति ने कहा कि मेरा सपना है कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षा और नवाचार के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। विश्वविद्यालय में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि खिलाड़ियों को उचित मार्गदर्शन, बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो वे विश्वविद्यालय और देश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण एवं आवश्यक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बैडमिंटन (पुरुष एवं महिला), योगाभ्यास (पुरुष एवं महिला) तथा रस्साकसी (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बना।

कुलपति ने प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना, अनुशासन और निरंतर मेहनत है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसी भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, उपकुलसचिव श्री अजीत प्रताप सिंह, खेलकूद परिषद के सचिव प्रो. शेखर सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. देवराज, प्रो. गिरधर मिश्रा, डॉ. रसिकेश. डाँ. शशिकांत यादव, डॉ. मनोज पाण्डेय, रजनीश कुमार सिंह, डॉ. राजेश सिंह, सतेन्द्र कुमार सिंह, अल्का सिंह, विजय प्रकाश, जय सिंह गुहिलौत, सहित अन्य शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति ने विद्यार्थियों से खेल के साथ-साथ शिक्षा, शोध और नवाचार में उत्कृष्टता हासिल कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को “खेलेगा भारत, जीतेगा भारत” की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *