लोक कवि- जयन्त्री प्रसाद जगमग

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: श्याम नारायण पाण्डेय, जौनपुर

जौनपुर नगर के समीप मोहल्ला पालपुर मुरादगंज के निवासी लोक कवि जयन्त्री प्रसाद जगमग अपनी ठेठ शैली और देशज रचनाओं के मान्य कवि हैं। आप का अभी तक आधे दर्जन से ज्यादा कविताओं का संग्रह और संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। लोक गायक आपकी कविताओं को गाकर के वाहवाही बटोर रहे हैं ।
अपने ग्रामीण परिवेश को केंद्र में रखकर दोहा, छन्दों, सवैयों और गीतों द्वारा ग्राम में साहित्य को समृद्ध करते हुए भविष्य चेतना,माटी क महक,हीरा हमार भैया-  मोती हमार भौजी, जगमग दीप, जगमग कहानियां,कल्पना कुंज की रचना किया है ।
अपने देश, समाज, संस्कृति, संस्कारहीनता की रक्षा पर लेखनी चलाकर भारत के गौरव को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया है।  आज के नौजवानों को प्रेरणा देते हुए  पश्चिम की संस्कृति को छोड़कर अपनी माटी से जुड़ने को अपने प्रमुखता दी है । जयंती प्रसाद ने कहा है कि-

हाथ से हाथ मिलाए के देखो
      गले से गला लगाए के देखो
      दिनों अधीनो के हित को साँवरो
      प्यार का रंग चढ़ाई के देखो

आपने नौजवानों को ग्रामीण परिवेश और गांव की देन को रेखांकित करते हुए कहा है  समझया है कि-

गांव की देन है जो शहरी सब
         ऐसो आराम किया करते हैं ।
        फल फूल और अन्य को खा के
         शहरी सब लोग मजा करते हैं

आज किशोर की स्थिति अपने माता- पिता परिवार के प्रति नकारात्मक हो रही है। इस पर भी जगमग जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से कहा है कि आज नहीं तो कल अपने घर और परिवार में लौट के आना ही होगा।

जगमग जी  लोक साहित्य सर्जना के ऐसे हस्ताक्षर हैं जिन्हें लोक गायक भविष्य में बहुत समय तक गाते रहेंगे।

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