किसानों का जीना मुश्किल है

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उत्तर प्रदेश में गांव में खेती करने के लिए ना मजदूर मिल रहे हैं ना तो पर्याप्त बिजली ही मिल रही है।संसाधन भी इतने महंगे हैं कि आम कृषक उनका खर्चा नहीं उठा पा रहा है। ट्रैक्टर की जुताई काफी महंगी है किसी तरह यह व्यवस्था हो भी गई है तो बीज ब्लॉक मुख्यालय पर इतना काम आता है कि किसान को प्राइवेट बीज भंडार का दरवाजा खटखटाना ही पड़ता है। यहां दोगुने दाम पर बीज मिलता है।

खाद की महंगाई भी आसमान छू रही है, खाद सही है या खाद में भी मिलावट है। यह तो दुकानदार (खेला) ही जाने। सिंचाई के लिए बिजली का समय पर ना आना इसकी शिकायत बनी रहती है। अनायश ही समय जाया होता है। सभी व्यवस्था होने के बाद मजदूर ही नहीं मिलते क्योंकि उन्हें मुफ्त अनाज और बिना काम किए मनरेगा से पीने का पैसा सरकार नियमित रूप से दे रही है। उन्हें जब बिना काम किए खाना-पीना दोनों मिल रहा है तो वह काम क्यों करेंगे ? सब ठीक भी हो गया तो फसल पर घड़रोजो का आतंक सबसे बड़ी समस्या है। उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, यदि किसी ने उन्हें मारने का प्रयास किया तो उनके खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज हो जाएगी। किसानों का जीना तो चारों ओर से मुश्किल हो गया है। इसके बाद बैंक केसीसी के लिए किसानो को अलग परेशान कर रही है। बैक मैनेजर यह नही सोचते कि जब सारी फसले घड़रोजो के हवाले ही हो जाती हैं तो किसान केसीसी का पैसा कैसे अदा करेगा.?

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