महात्मा गांधी जी के जयंती पर विशेष –

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जौनपुर: एमजीकेवीपी – महात्मा गाँधी वास्तव में एक राजनेता नहीं बल्कि जननेता थे, गाँधी जी शासन एवं अर्थव्यवस्था में विकेन्द्रीकरण के समर्थक थे। कुटीर व लघु उद्योगों के माध्यम से गांधी जी प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे, उन्होने अपनी विचारधारा के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में स्वतंत्रता संग्रामों और मानवाधिकार आंदोलनों को प्रभावित किया। उनके सिद्धांतों ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं को प्रेरित किया।
भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन के उत्तरार्ध में गांधी की छवि निर्विवाद रूप से भारत के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में अंकित हो चुकी थी।

महात्मा गाँधी की जनस्वीकार्यता उनके सिद्धांतों, कार्यों और व्यक्तिगत विशेषताओं का परिणाम है। उन्होंने न केवल भारतीय समाज को एक नई दिशा दी, बल्कि विश्व को यह सिखाया कि शांति और अहिंसा के माध्यम से भी बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
आज जब लगभग पूरा विश्व एक अघोषित युद्ध के मुहाने पर खड़ा है तब गांधी की विरासत के रूप में उनकी शिक्षाएं एवं उनके विचार और ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं।

  • सौरभ त्रिपाठी
    शोध-छात्र
  • हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग
  • महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ,
    वाराणसी

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