पुण्यतिथि पर याद किए गए साहित्य वाचस्पति श्रीपाल क्षेम

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जौनपुर। साहित्य वाचस्पति कविवर श्रीपाल क्षेम की पुण्यतिथि पर लाइन बाजार स्थित विकलांग पुनर्वास केंद्र में श्रद्धांजलि सभा का अयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता रूपसेवा संस्थान के प्रबंधक पंडित रामकृष्ण त्रिपाठी ने किया।इस अवसर पर कविवर क्षेम के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।कार्यक्रम में बीएचयू के समाजशास्त्र के आचार्य एवं उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर आरएन त्रिपाठी ने मुख्यातिथि की भूमिका निभाते हुए कहा कि कवि की कृतियाँ समाज का मार्गदर्शन करती हैं और कवि को कालजयी बना देती हैं।


इस अवसर पर जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष और श्रीपाल सिंह क्षेम के सुपुत्र शशिमोहन सिंह क्षेम ने अपने पिता का संस्मरण सुनाया और कहा कि वे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे।कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित रामकृष्ण त्रिपाठी ने उपस्थित कवियों एवं गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि जमदग्निपुरम की यह मिट्टी साहित्य सृजन के लिए बहुत उर्वरा है अतः इस उर्वरा भूमि के उर्वरत्व का लाभ उठाना चाहिए।कविवर क्षेम अपनी कृत्यों से सदा अमर रहेंगे क्योंकि कवि मरते नहीं वे अपनी शब्दब्रह्म रूपी कृतियों के सृजन करने के कारण अमर हो जाते हैं।
श्रद्धांजलि सभा के पश्चात द्वितीय सत्र में काव्यपाठ का आयोजन किया गया।कवयित्री काजल पाठक की प्रस्तुति ‘बाबा तेरी लाड़ली बिन तेरे ब्याही जाएगी’ ने माहौल के संवेदना से भर दिया।कवयित्री विभा त्रिपाठी की रचना ‘छेड़ तू वीणा के तार’ तो सहृदयों के ह्रृदय तक प्रविष्ट हो गई।प्रतापगढ़ से आए वीररस के कवि डॉक्टर रणजीत सिंह ने जग है एक नाट्यशाला के द्वारा ओज का भाव भर दिया।अखिलानंद पांडये,फूलचंद भारती,सूर्यभान उपाध्याय ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को झुमा दिया।मानस हंस प्रोफेसर आरपी ओझा ने तो महफ़िल में चारचाँद लगा दिया और भक्तिमय वातावरण में उपस्थित जनसमूह को सराबोर कर दिया।


इस कार्यक्रम में पुस्तक कुटीर के अधिष्ठाता पंडित रामदयाल द्विवेदी, पत्रकार देवी सिंह,वरिष्ठ कांग्रेस नेता दयासागर राय, दयासागर सिंह,राजेन्द्र सिंह,प्रोफ़ेसर भारतेंदु मिश्र,एडवोकेट गौरीशंकर मिश्र एवं ओमप्रकाश दुबे,लोकेश यादव,बेहोश जौनपुरी, डॉक्टर पीपी दुबे एवं डॉक्टर रामजी तिवारी आदि ने ने पुष्पांजलि अर्पित कर कविवर क्षेम को श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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