प्रो. देवराज सिंह के निर्देशन में हुआ शोध कार्य
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में हुए दो महत्वपूर्ण शोध कार्य भविष्य में ऊर्जा संरक्षण, औद्योगिक विकास और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकते हैं। भौतिक विज्ञान विभाग के अंतर्गत किए गए इन अध्ययनों में ऐसे उन्नत पदार्थों और नैनो द्रवों के गुणों का विश्लेषण अल्ट्रासोनिक तकनीक से बहुत गहराई से किया गया है, जिनका उपयोग बेहतर ऊर्जा प्रबंधन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ताप नियंत्रण प्रणालियों और औद्योगिक उत्पादन में किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. देवराज सिंह के निर्देशन में शोधार्थी राकेश कुमार की पीएचडी मौखिक परीक्षा संपन्न हुई। दोनों शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण करते हुए उनके वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।
शोधार्थी उन्नत पदार्थों एवं नैनो द्रवों के अल्ट्रासोनिक, यांत्रिक और तापीय गुणों पर आधारित अपने शोध में विभिन्न प्लैटिनम समूह के धात्विक पदार्थों, अंतर धात्विक पदार्थों तथा धात्विक ऑक्साइडों का अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इन पदार्थों के गुणों की बेहतर समझ भविष्य में ऊर्जा दक्ष उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी और ताप प्रबंधन प्रणालियों के विकास में सहायक हो सकती है। मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए थेलियम मोनोपनिकटाइडस के इलास्टिक, मैकेनिकल और ऊष्मा भौतिक गुणों की भविष्यवाणी की। साथ ही जिंक ऑक्साइड और एल्युमीनियम ऑक्साइड आधारित नैनो द्रवों के अध्ययन से ऊष्मा संचरण क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया, जिसका उपयोग उद्योगों, शीतलन प्रणालियों और ऊर्जा क्षेत्र में किया जा सकता है।
मौखिक परीक्षा में वाह्य विशेषज्ञों ने शोधार्थी से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। शोधार्थी ने अपने शोध से जुड़े प्रश्नों के स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर दिए, जिसके बाद उनके कार्यों की सराहना की गई।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह, बाह्य परीक्षक गण, शोध निर्देशक प्रो. देवराज सिंह, रज्जू भैया संस्थान के प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने शोधार्थी राकेश कुमार को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे शोध कार्य केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि समाज, उद्योग और विज्ञान के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इन शोधों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऊर्जा की बचत, औद्योगिक उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, उन्नत तकनीकों के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयाम स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।












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