जौनपुर में बदनाम हो रही है पत्रकारिता, अपराधी भी बने हैं पत्रकार

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श्याम नारायण पाण्डेय :

अंक -1 :

जौनपुर नें एक कथित न्यूज़ चैनल से जुड़े अनिल तिवारी नामक पत्रकार को आईपीसी की धारा 436 के तहत 20 दिसम्बर 2023 को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। कथित पत्रकार अनिल खुटहन थाने के डिहियां गॉव का निवासी है।

आरोप है कि उसने उसी गॉव के प्रधान रमाशंकर तिवारी के रिहायशी मकान में आग लगा दी थी जिससे उनके घर में रखा 40 कुंतल भूषा, 10 कुंतल गेहूं, 12 कुंतल चावल, कीमती इमारती लकड़ी, लोहे का गाटर और घर में रखा गृहस्थी का लाखो रूपये का सामान जलकर नष्ट हो गया था। आग लगाकर भागते समय लोगो ने उक्त व्यक्ति को पहचान लिया था और भुक्तभोगी ने उसपर नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।

कथित पत्रकार भागा-भागा फिर रहा था लेकिन खुटहन पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान पिलकिछा तिराहे पर गिरफ्तार कर ही लिया। विधिक कार्यवाही के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी अनिल तिवारी को जेल भेज दिया।

बताया गया है कि उक्त कथित पत्रकार वर्ष 2019 में पशु अतिचार/क्रूरता अधिनियम 1871- धारा(11) के अंतर्गत इसके पहले भी जेल भेजा गया था। इन दिनों वह जमानत से जेल से बाहर आया था। फिर पुलिस वगैरह से बचने के लिए वह कथित पत्रकार बनकर पुलिस को आदेश देने की स्थिति में हो गया। आरोपी पत्रकारिता की धौंस पर क्षेत्रीय लोगों को भी परेशान करने लगा था।

पूर्वांचल में पत्रकारों की स्थिति
चिंताजानक
:

इन दिनों पूर्वी उत्तर प्रदेश में, विशेष रूप से जौनपुर में पत्रकारो की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गयी है। इनकी संख्या में तो बेतहासा वृद्धि हुई है। गोस्वामी तुलसीदास के अनुसार –

नारि मुई गृह सम्पति नासी,
मूड़ मुड़ाहिं होहिं सन्या
सी।

अर्थात जिसके पास घर में कोई सम्पत्ति नहीं है, कोई योग्यता नहीं है वह येन केन प्रकारेण पत्रकार बनकर रंगबाजी के साथ तमाम असामाजिक और अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। इसकी शैक्षित योग्यता, इनकी लेखन प्रतिभा, इनके बातचीत का तौर-तरीका और इनका व्यवहार देखने से ऐसा लगता है कि पत्रकारिता ने एक नया ही रूप धारण कर लिया है।

ये तमाम कथित पत्रकार, पत्रकारिता की मर्यादा को कलंकित कर समाज का ही उत्पीड़न और शोषण करने में लग गए हैं। इन्हें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, विकास भवन, तहसीलों, थानों और एआरटीओ कार्यालय के आसपास मंडराते हुए देखा जा सकता है। जबकि अपराध से सम्बंधित खबरों के लिए पुलिस विभाग द्वारा, विकास और प्रशासनिक खबरों के लिए जिला सूचनाधिकारी द्वारा सभी समाचार पत्रों और के ब्यूरो कार्यालयों/ प्रतिनिधियों को खबर भेजने की पूरी व्यवस्था है। केवल दलाली की नीयत से ये सम्बंधित कार्यालयों के सामने मंडराते हुए देखे जा रहे हैं।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से आम जनता द्वारा यह अपेक्षा की गयी है कि वे सभी समाचार पत्र/ चैनल से प्राधिकार पत्र पाने वाले पत्रकारों के चरित्र की भी जाँच एलआईयू द्वारा कराने के बाद ही उनका सूचना विभाग में पंजीकरण कराएं। अन्यथा पत्रकारो की वर्तमान टीम में तमाम अनिल शामिल हैं। क्योंकि अधिकारियो की नजर में मान्यवर बनने के लिए यही रास्ता सस्ता और सर्वोपरि है। जिलाधिकारी से यह भी अपेक्षा की जाती है कि स्थानीय पत्रकार संगठनों को भी यह जिम्मेदारी दें कि ऐसे लोग उनके संगठन में न शामिल हों, जिससे पत्रकारिता की मर्यादा को धूल-धूसरित होने से बचाया जा सके।

शेष अगले अंक में…..

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