कथा जो परम लोकहितकारी, सोई पूछन चह शैल कुमारी : मानस मर्मज्ञ पं. वशिष्ठ नारायण उपाध्याय

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श्री शंकर आदर्श ग्रामोद्योग बालिका विद्यालय इमलो पाण्डेयपट्टी में चल रहे ज्ञान यज्ञ में श्रीमद्भागवद पुराण और तुलसीकृत रामचरित मानस कथा में विद्वान ब्यासद्वय आचार्य महेंद्र पाण्डेय एवं मानस मर्मज्ञ वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने अपने सरस प्रवचन से श्रोताओ को मुग्ध कर दिया।

श्रीमद्भागवद पुराण के ब्यास आचार्य पाण्डेय ने प्रारम्भ में केवल मंगाचरण पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि महर्षि ब्यास ने इस पुराण में सत्यम परम धीमहि की व्याख्या करते हुए सत्य से ही मंगल का विधान बताया। इसके पश्चात मानस मर्मज्ञ पं. वशिष्ठ नारायण चतुर्वेदी ने माँ पार्वती द्वारा जनकल्याण के लिए कही गयी भगवान शंकर द्वारा राम कथा की पूर्ण व्याख्या की।

भगवान शंकर ने राम कौन हैं इसके बारे में माँ पार्वती की शंका का समाधान करते हुए बताया कि यह कथा ही पार्वती जी आप लोकहित के लिए रामकथा को सुनना चाहती हैं यह बड़ा अच्छा है।

यही से अपने प्रवचन का समापन करने हुये उपाध्याय जी ने वर्तमान परिवेश में कथा की प्रासंगिकता को व्याख्यायित किया। आपने राजनीतिज्ञों पर भी लक्ष्य करते हुए कहा कि जिसको कानून की व्याख्या करनी चाहिए वे आज वेद और पुराणों की व्याख्या कर रहे हैं, अच्छा है कि अपनी सीमा में रहें। जिनके कल्याण के लिए चुनकर भेजे गए हैं वही काम निष्ठा से करें।

लगातार 14 वर्षों से चल रही इस कथा यात्रा के प्रबंधक पं. शीतला प्रसाद मिश्र ने आगत भक्तों से आग्रह किया कि वे कथा में ज्यादा से ज्यादा संख्या में समय से पधारें और कथा का लाभ लें।

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