प्रयागराज महाकुंभ राजनीति का अखाड़ा बना

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प्रयागराज : विगत 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ जैसे राजनीति का अखाड़ा बन गया है। सनातन पर्व का यह आयोजन अत्यंत विशाल, भव्य और दिव्य रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसकी व्यवस्था किए जाने के कारण यह पर्व भी ईडी गठबंधन के सभी दलों के निशाने पर आ गया है। इस गठबंधन के सारे नेताओं का बड़ा ही शर्मनाक बयान इस पवित्र पर्व के बारे में देखने को मिल रहा है। जो बड़ा ही दुखद और निंदनीय है। विरोधियों के विचार में कुंभ क्या है यह दर्शनीय है। मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल सुश्री ममता बनर्जी का कहना है कि यह मौत का महाकुंभ है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने खुद तो स्नान किया लेकिन कहते हैं कि सैकड़ो लोगों का प्राण लेने वाला यह कुंभ है।

सरकार की कुव्यवस्था के चलते ऐसा हुआ। व्यवस्था बहुत ही खराब थी। कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कहते हैं हिंदू तो हिंसक होता ही है उसके सारे आयोजन में सांप्रदायिक कृत्य होते रहते हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है की कुंभ में नहाने का क्या मतलब होता है? क्या नहाने से रोजी- रोटी मिल जाएगी? सपा की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन का कहना है की सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी कुंभ का ही है जहां पानी में मृतकों की लाशे तैर रही हैं। बिहार के राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव का कहना है की कुंभ क्या है बेकार ? डीएमके के मुख्यमंत्री का कहना है कि सनातनी लोग खटमल हैं जितने जल्दी हो सके उन्हें मार देना चाहिए ? 3 दिन पूर्व कांग्रेस के एक संगठन कांग्रेस सेवा दल द्वारा प्रयागराज में सेक्टर 15 में एक शिविर देखा जा रहा है जहां बताया जाता है कि शिवरात्रि के दिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी संगम में स्नान करने के लिए प्रयागराज पधारेंगे। 65 करोड़ लोगों ने इस महाकुंभ में संगम में स्नान किया। यह कहा जाता है कि यह वैश्विक महाकुंभ आयोजन अब तक के सभी आयोजनों से विशाल और भव्य है जिसमें लगभग 65 करोड लोगों ने स्नान किया। बताया जाता है कि यह महाकुंभ आयोजन में हिंदू सनातन धर्मावलंबी इसलिए भी बड़ी संख्या में इसमें आए कि यह पर्व ज्योतिष गणना के अनुसार 144 वर्ष बाद आया है इसलिए भी यह महत्वपूर्ण है।

आयोजन का काला अध्याय

इस आयोजन में 29 जनवरी अर्थात मौनी अमावस्या के दिन अमृत सिद्ध योग की मुहूर्त में संगम पर स्नान के लिए जो भगदड़ हुई उसमें शासन की घोषणा के अनुसार 30 लोगों की मृत्यु हो गई और लगभग 100 लोग घायल हुए। यह इस पर्व का काला अध्याय है। इसी समय बताया गया है कि झूसी की तरफ भी एक और भगदड़ हुई थी इसमें भी लोग मारे गए थे। सरकार ने इसकी संख्या को छुपा लिया है। इसी संख्या को विरोधी लोग बड़ा-चढ़कर बता रहे हैं। कोई इसे 100 बतलाता है तो कोई हजार तक चला जाता है। यह अप्रिय वारदात तो हुई है। इसका कष्ट सभी को है।

संत लोगों का मत

इस आयोजन में पधारे शंकराचार्य, अनेक संत, महंत, महामंडलेश्वर, धर्माचार्य, व्यास और ऋषि तुल्य लोग इसे भव्य और दिव्य बताते हुए आयोजन को सफल बताते हैं। उनका कहना है कि ऐसा महाकुंभ आयोजन

– ना भूतों न भविष्यति।

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