केजरीवाल का क्या होगा ?

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दिल्ली राज्य के निर्वाचन का परिणाम आ गया। नामांकन के पूर्व तो ऐसा लगा था कि अब की बार भी सरकार केजरीवाल की ही बनेगी। जीत सुनिश्चित है। पूर्व की भांति देश की समस्त विपक्षी पार्टियों जैसे टीएमसी, शिवसेना ठाकरे, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके आदि सभी दलों के उच्च स्तरीय नेताओं ने यहां आकर दिल्ली विधानसभा क्षेत्र को मथ डाला। इस मामले में सभी ने एक रिकॉर्ड बना दिया और कहा कि सत्ता को यह दिखा देना है कि ज्यादा दिन तक उनका अधिनायकवाद नहीं चलेगा।
कांग्रेस इस निर्वाचन में पहली बार अलग थी और अपने उम्मीदवारों के लिए भरपूर प्रचार किया। गांधी परिवार अर्थात सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भाजपा और साथ-साथ केजरीवाल के विरुद्ध भरपूर प्रचार किया।भाजपा के विरोध में तो बहुत कम बोल रहे थे लेकिन केजरीवाल को क्या नहीं कहा। सब कुछ कह डाला। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा प्रचार बहुत कम देखा गया है जिसमें शब्दों का संयम बुरी तरह से टूट गया हो।
मतदाताओं को लुभाकर उनका वोट कैसे बटोरा जा सकता है इस कार्य में तो अरविंद केजरीवाल का कोई जोड़ नहीं है। इस बार भी उन्होंने अपना पासा फेंका तो जरूर लेकिन दिल्ली की जनता ने उनका विश्वास नहीं किया। केजरीवाल को यह मलाल था कि एक छोटे से ऐसे प्रदेश जहां लेफ्टिनेंट गवर्नर का राज होता है,के लिए प्रधानमंत्री प्रचार कर रहे हैं।उन्होंने यह तंज भी कसा कि प्रधानमंत्री अपनी औकात देख लें केजरीवाल फिर आ रहा है।

दिल्ली की वह जनता जो विशेष रूप से जो इनके खाटी मतदाता थे, वे उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर थे।उन लोगों ने केजरीवाल की बात का विश्वास नहीं किया। जब कोरोना काल एक विपत्ति के रूप में उनके ऊपर टूट पड़ा था और केजरीवाल को उनकी मदद करना चाहिए था तब उन्होंने उनको उनके मकान मालिकों से यह कह के बाहर करवा दिया कि यह उत्तर प्रदेश और दिल्ली वाले मजदूर बहुत गंदे हैं उनकी गंदगी से तुम भी कोरोना के शिकार हो जाओगे।
केजरीवाल ने बिहार और उत्तर प्रदेश वाले मजदूरों को दिल्ली की सीमा से बाहर करवा दिया।

और भला हो उत्तर प्रदेश सरकार के संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के खर्चे से इन सभी लोगों को जितनी सुविधा हो सकती थी दे करके उनको उनके घर पहुंचवाया।कोरोना समाप्त होने के बाद यह सभी लोग फिर अपने अपने ककंपनियों में अपने-अपने स्थान पर जहां वह काम करते थे वापस आए और फिर 2025 में दिल्ली का चुनाव आ गया।

इन लोगों के पास केजरीवाल ने जा जाकर के शपथ लेकर के इनको एक अच्छा इंसान बनाने, इनकी झुग्गी झोपड़ियों को महल बनाने का आदि तमाम वादे किये लेकिन यह वादा उनके गले नहीं उतरा क्योंकि वह बुरी तरह से प्रताड़ित किए गए थे। अंत में केजरीवाल स्वयं हार गए। उनकी पार्टी भी हार गई। वह खुद नहीं जीत पाए।

अब उनकी स्थिति बहुत ही खराब चल रही है। अब केजरीवाल की इच्छा है कि वह जोड़-तोड़ करके भगवंत सिंह मान जो पंजाब के मुख्यमंत्री हैं उनके स्थान पर खुद मुख्यमंत्री बने। इस आशा से उन्होंने अपने यहां विधायकों को बुलाया और दिल्ली के अलावा पंजाब के विधायकों को भी बुलाया। अपनी बात तो नहीं रखी लेकिन जब उन्होंने देखा कि हमारी बात यहां हल्की पड़ जाएगी तब उन्होंने बहुत जल्दी में अपनी बात को समाप्त करके मीटिंग को समाप्त कर दिया। अब उनके सामने यह है कि क्या करें, कहां जाएं, कैसे अपना अस्तित्व बचाएं।वे बहुत ही खामोश हो करके यह सोच रहे हैं कि अब उनकी जमानत की तारीख भी लगभग समाप्त हो रही है फिर तिहाड़ जाना पड़ेगा।
केजरीवाल ही ऐसे व्यक्ति हैं जिनके लिए बहुत से विकसित देश जो बहुत ही शक्तिशाली हैं परेशान हो जाते हैं जैसे अमेरिका, जर्मनी, कनाडा आदि। यह देश तो मित्रता भारत सरकार से रखते हैं लेकिन भारत सरकार का स्तर हमसे ऊंचा ना हो इसलिए किसी न किसी ऐसे व्यक्ति को पाले रहते हैं जो हमेशा सरकार के आंखों की किरकिरी बना रहे। वह व्यक्ति मुख्य रूप से इस समय केजरीवाल ही हैं। केजरीवाल एक ऐसे व्यक्ति हैं जो भारत के इतिहास में हमेशा याद किए जाएंगे अपने सुशासन के लिए नहीं अपनी के लिए अपने झूठ के लिए और अपने देशद्रोही चरित्र के लिए।

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