वशिष्ठ नारायण सिंह
जौनपुर। वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में देश का कोई भी ऐसा कोना नहीं है जहां हाहाकार न मचा हो। समाज का हर एक तबका – जैसे किसान, व्यवसायी, शिक्षक, छात्र, शिल्पकार, कामगार, मेहनतकश- मज़दूर आदि आर्थिक कष्टों से कराह रहा है। कहीं भी कोई ठिकाना नहीं दिखलाई पड़ रहा है जहां इंसान को थोड़ी राहत मिल सके।
यह कितना दुख:द आश्चर्य है कि जिस सामंतवाद से जनता को मुक्ति दिलाने के लिए हमारे देश के महान नेताओं ने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना की, आज उसी लोकतंत्र को भ्रष्ट पूजीवाद ने अपने आर्थिक हितों के लिए अपने चंगुल में ले रखा है, कहा तो यह जाता है कि भ्रष्ट पूजीपतियों ने अपनी पूंजी की ताक़त से लोकतंत्र को अपने आंगन में बंधक बना लिया है।
जब भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी हुई सरकार जनता की दुख दर्द का ख्याल न करते हुए जनकल्याणकारी कार्यों की उपेक्षा करती हुई मनमानी कारनामों को अंजाम देते हुए सत्ता का दुरुपयोग करती है और सत्तारूढ़ सरकार अपने खिलाफ जन भावनाओं को दबाने के लिए बल प्रयोग करती है तो जनता में जबरदस्त आक्रोश पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है इसे दबाने के लिए सरकार जब राष्ट्रहित, शांति स्थापना, राष्ट्रीय एकता, व अखंडता के नाम पर सत्ताबल का क्रूरतम प्रहार करती है तो इसे ही फासिस्टवाद कहा जाता है। आज की विषम परिस्थिति में देश में चतुर्दिक यही फासिस्टवाद अंगड़ाई ले रहा है।












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