जौनपुर। पिछले दो माह से वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० वंदना सिंह के विरुद्ध चल रही नकारात्मक चर्चाएं दीक्षांत समारोह के आयोजन की तिथि आने के बाद ठंडी हो गई हैं। अब कुलपति विरोधी खेमे के लोग यह कहने लगे हैं कि दीक्षांत एक ऐसा समारोह है जिससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा जुड़ी होती है।
विश्वविद्यालय केवल कुलपति का ही नहीं है, वह सबका है। ऐसी स्थिति में यदि विश्वविद्यालय में कोई बवाल होता है तो उसमें बदनामी सभी की होगी वह चाहे संबद्ध महाविद्यालयों का परिवार हो, विश्वविद्यालय का शिक्षक हो, छात्र हो अथवा कर्मचारी हो।विश्वविद्यालय एवम् विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों का कहना हैं कि प्राय वर्ष में एक बार ही दीक्षांत समारोह का आयोजन किये जाने की परंपरा रही है।
विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद यह पहली बार ऐसा हो रहा है कि 3 वर्ष में यह चौथा दीक्षांत समारोह होने जा रहा है। लोग अपने-अपने ढंग से इसका कारण बताते हैं। विश्वविद्यालय में इसके पूर्व कई विभागों / विषयों के सहायक प्रोफेसरों की छुट्टी करके उनके स्थान पर नए प्राध्यापकों की नियुक्ति की चर्चा आम थी यह भी कहा जा रहा था कि पूर्व नियुक्त प्रोफेसरों को ही यदि स्थायित्व दे दिया जाता तो ज्यादा उचित होता।
अपरञ्च- दो ब्राह्मण प्रोफेसरों की आपसी मुर्ग लड़ाई, जिसमें एक ने अपने दो सिंघम शोध छात्रों की पीठ ठोकर दूसरे के विरुद्ध राजभवन तक शिकायती पत्र दिलवा दिया था।












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