मंत्री ने पत्रकारिता की ऐसी तैसी कर दी

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जौनपुर: सदस्यता अभियान में प्रगति की जानकारी पत्रकारों को देने के लिए भाजपा द्वारा एक बैठक सिद्धार्थ उपवन में बुलाई गई थी, जिसमें भाजपा पदाधिकारी के अलावा कृपा शंकर जी, ओम प्रकाश सिंह, पुष्पराज सिंह आदि लोगों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री गिरीश चंद्र यादव भी थे। कार्यक्रमों की जानकारी ना मानते हुए एक पत्रकार मंत्री गिरीश यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने लगे, इस पर वातावरण विषाक्त हो गया मंत्री और पत्रकार में एक दूसरे को देख लेने की बात होने लगी।

इस जनपद में इस समय पत्रकारों की संख्या बहुत बढ़ गई यह क्षेत्र ऐसे लोगों के लिए बहुत ही सम्मानजनक लगता है। जिसको कहीं कुछ सरकारी सेवा में चपरासी की भी जगह नहीं मिली ऐसे लोग भी इस क्षेत्र में आ गए हैं। न उनको जानकारी है, न शिक्षा है। न ही संस्कार हैं ।अभी कुछ एक पत्रकार जेल से छूटे हैं, कुछ जेल की शोभा बढ़ा रहे हैं, और कुछ जेल जाने की तैयारी में हैं क्योंकि अपराध और दलाली पेशे से जुड़े रहे है। सवाल इस बात का है कि प्रेस कांफ्रेंस किस विषय पर बुलाई गई है विषय सदस्यता अभियान का हो तो उसमें वार्ता न करके पूर्वाग्रह के चलते किसी मंत्री को भ्रष्टाचारी कहना यह कतई उचित नहीं है। यदि कोई मंत्री प्रगति के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाता है तो बजट और कार्यक्रम की प्रगति का सत्यापन करके उस पर सवाल किया जा सकता है। बगैर होमवर्क के सवाल करने पर अक्सर पत्रकारों को नीचा देखना पड़ता है। बातें प्रेम से भी पूछी जा सकती हैं चिढ़ाने के अंदाज में नहीं अन्यथा एक कलह का वातावरण तैयार होता है। यही स्थिति इस प्रेसगोष्ठी में हुई।

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