बुल्डोजर न्याय पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी अति महत्वपूर्ण- आलोक त्रिपाठी लकी

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जौनपुर : विकास दुबे से लेकर वर्तमान में तत्काल न्याय की जो उत्तर प्रदेश में और उसी की देखा देखी कुछ अन्य राज्यो में चल रही थी उसको माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सिरे से नकार दिया। निर्णय स्वागत योग्य है क्योंकि हमारा सम्पूर्ण न्याय विधान इस धुरी पर है कि भले ही कानून की कमजोरियों का लाभ कोई अपराधी बच जाय पर किसी निर्दोष को सजा नही होनी चाहिए। इस संदर्भ में प्राचीन सनातन परंपरा में हम ऋषि मांडवी के प्रकरण का उल्लेख कर सकते है।
खैर अगर हम हाल फिलहाल में हुई घटनाओ के बारे में विचार पूर्वक देखे तो लगेगा कि मात्र मात्र प्रशंसा पाने के लिए अपने को फ़िल्म नायक का हीरो सिध्द करने की सनक के चलते सत्ता धिशो ने यह कार्य किया। जरा सोचिए कि किसी अपराधी की गलती की सजा उससे संबंधित सभी लोग परिवार के लोग पा रहे हैं। एक हद तक यह भी सोच हो सकती है कि भय से अपराध को रोक दिया जाय पर सम्पूर्ण विश्व मे इस प्रकार की दंड प्रक्रिया शायद ही कहि हो। जहाँ कहि भी इस प्रकार की दण्ड प्रक्रिया है भी वहाँ सजा अपराधी को ही दी जाती है ना कि सम्पूर्ण परिवार को।
लोकतंत्र के प्रखर फ्री माननीय सर्वोच्च न्यायालय को कोटिशः धन्यवाद।

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