चाइनीज मांझे ने ली डॉक्टर की जान

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जौनपुर। जौनपुर जनपद की सड़कों पर चाइनीज मांझा अब पतंग उड़ाने का साधन नहीं, बल्कि खुलेआम मौत का हथियार बन गया है। कुछ ही दिन पहले एक शिक्षक की जान गई, और बुधवार को पंचहटिया रोड, प्रसाद इंटरनेशनल स्कूल के पास, अपने कर्तव्य पर जा रहे चिकित्सक डॉ०समीर हाशमी भी इसी जानलेवा मांझे का शिकार हो गए।

ज़िला प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया पुलिस अलर्ट पर है, प्रेस नोट जारी किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वही चाइनीज मांझा बाजार में आसानी से बिक रहा है बच्चों के हाथों में पहुँच रहा है और लोगों की जिंदगी छीन रहा है।

यदि प्रशासन चौकन्ना है, तो यह कैसे हो सकता है? और अगर मौन है, तो क्यों जारी है यह खतरनाक खेल? यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता की लगातार चेतावनी है। आदेश तो हैं, चेतावनी तो हैं, पर जमीन पर कोई नतीजा नहीं। हर मौत के बाद वही घिसा-पिटा बयान जांच होगी,कार्रवाई होगी और फिर अगली घटना तक सब कुछ भूल जाए।

सवाल अब जनता पूछ रही है

इन मौतों की जिम्मेदार आख़िरी कौन ?

क्या यह सिर्फ कागजों में प्रतिबंध है ?

क्या प्रशासन सच में चौकन्ना है, या यह सब मुखौटा प्रतिबंध बनकर रह जाएगा?

प्रशासन से निवेदन है कि प्रतिबंधित मांझे को पकड़ जाने के उपरांत चाइनीज मांझे को आग में जलवा दिया जाए।

आवश्यक कदम
दुकानदारों पर कड़ी आपराधिक कार्रवाई की जाए व दुकानदार जहां से लाकर बेच रहा है वहां पर भी सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

हर गली-मोहल्ले में छापेमारी अभियान।

बच्चों तक पहुंचने से रोकने के लिए सख्त निगरानी।

अगर अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में सड़कें और स्कूल-मोहल्ले मौत की चपेट में होंगे। जनता को आदेश नहीं, नतीजे चाहिए।

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