डीएम का संदेश: दान, सेवा और समरसता से ही होगा समाज का उत्थान

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जौनपुर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जिलाधिकारी डॉ०दिनेश चन्द्र ने जनपदवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “मकर संक्रांति सनातन संस्कृति में दान, पुण्य और आत्मशुद्धि का महापर्व” है। यह पर्व भगवान सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जिसे शास्त्रों में देवताओं का काल माना गया है। इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि मकर संक्रांति आत्मसंयम, करुणा और सेवा भाव को जाग्रत करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन सूर्योपासना, स्नान, जप-तप एवं दान से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। शास्त्रों में कहा गया है अन्नदान महादान है और विशेष रूप से इस दिन तिल एवं गुड़ से बने पदार्थों का दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि दान का तात्पर्य केवल धन से नहीं, बल्कि अहंकार, लोभ और मोह के त्याग से भी है। भूखे को भोजन कराना, जरूरतमंद को वस्त्र देना, विद्या का प्रसार करना और किसी की भावनाओं का सम्मान करना भी सर्वोच्च दान है।

डॉ०चन्द्र ने बताया कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जैसे वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, किसान पंजीकरण, डिजिटल फसल सर्वे और मतदाता सूची में युवाओं का नामांकन—भी सेवा और पुण्य का सशक्त माध्यम हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा सकता है।

अंत में जिलाधिकारी ने भगवान सूर्यदेव को नमन करते हुए सभी नागरिकों से अपील की कि मकर संक्रांति पर दान, संयम, सेवा और सामाजिक समरसता को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा वाणी, कर्म और व्यवहार से किसी का अपमान न करें।

उन्होंने सभी जनपदवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

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