वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम दुबे को मातृशोक

Share

जौनपुर। वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम दुबे की 92 वर्षीय माता श्रीमती राजकुमारी देवी का शनिवार 10 जनवरी को लखनऊ में निधन हो गया। इसके बाद जौनपुर के मड़ियाहूँ तहसील स्थिति रिकेवीपुर गांव में पार्थिव शरीर लाया गया जिसके बाद काशी के मणिकर्णिका घाट पर छोटे बेटे विनोद दुबे ने मुखाग्नि दी।

स्त्रियों के लिए आदर्श थीं अम्मा
उनके मझले बेटे सरोज कुमार दुबे ने बताया कि अम्मा खोना दुनिया के किसी भी दुःख से बढ़कर है।अम्मा न्याय की प्रतिमूर्ति थीं और जिस धैर्य और संतोष से जीवन बिताया वह आज की आधुनिक स्त्रियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

कम उम्र में पति का छुटा साथ, बच्चों पर पिता की तरह फेरा हाथ

93 वर्ष की जीने वाली राजकुमारी देवी के पति स्व महानन्द दुबे का निधन तब हुआ जब वे महज 35 की उम्र में थीं तब उनके ऊपर 3 छोटे-छोटे बेटों और 2 बेटियों की जिम्मेदारी और पति को खोने का पहाड़ टूट पड़ा। भीतर से बुरी तरह टूट जाने पर भी वे विचलित नहीं हुईं । बच्चों के लालन-पालन में हर बाधा पार करते हुए सभी को बड़ा किया और बच्चे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की नौकरी से लेकर राजधानी में बड़े पत्रकार के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

खुद के पास एक बीघा नहीं पर मायके से मिल रहे 40 बीघे को कर दिया दान

उनके पोते पत्रकार डॉ0 नील दुबे ने बताया कि दादी मेरे लिए मां से बढ़कर थी । मां ने तो पैदा किया पर पालनहार अम्मा ही थीं। अम्मा मेरी प्राथमिक गुरु थीं । उन्होंने सन्तोष को सुखी होने का कारण बताया । जब पति ने जीवन के बीच सफर में साथ छोड़ दिया तब मायके में बिना भाई के पांचों बहनों में जमीन का बटवारा तय हुआ। ऐसे में जब ससुराल में उनके पास एक बीघा भी जमीन नहीं थी तब मायके के बंटवारे में उनके हिस्से 40 बीघे जमीन देने की बात आई पर उन्होंने यह कहकर त्याग कर दिया की बहनों के बीच प्रतिद्वंद्विता में नहीं रहना। मेरे पास तीन बेटे हैं एक -एक रोटी भी मिले तो भी बचेगा।

उनके निधन की सूचना से परिवार समेत पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। अपने पीछे वे पोते पत्रकार अभिषेक दुबे, डॉ पलाश और ओम दुबे समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं हैं।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *