करंजाकला के सैदपुर गड़उर में मिला मलेरिया का नया मरीज

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जनवरी से अब तक 19 मामले, 18 मरीज स्वस्थ, एक का इलाज जारी

जौनपुर। ब्लॉक करंजाकला के सैदपुर गड़उर गांव में मलेरिया का एक नया मरीज मिलने के बाद जनपद में जनवरी 2026 से अब तक मलेरिया के कुल मरीजों की संख्या 19 हो गई है। जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि इनमें से 18 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि एक मरीज का उपचार चल रहा है। अब तक मलेरिया से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है।

उन्होंने बताया कि सभी मामलों के सापेक्ष निरोधात्मक कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। सैदपुर गड़उर में मरीज के घर जिला मलेरिया अधिकारी की टीम ने अशोक कुमार, सहायक मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में क्षेत्रीय आशा के सहयोग से फीवर सर्वे, ब्रीडिंग सोर्स सर्वे, सोर्स रिडक्शन, स्वास्थ्य शिक्षा, प्रचार-प्रसार, पोस्टर पेस्टिंग, पैम्फलेट वितरण एवं एंटी लार्वा रसायन के छिड़काव सहित विभिन्न गतिविधियां कराईं।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है। इसका परजीवी प्लाज्मोडियम नामक सूक्ष्मजीव होता है। मच्छर रुके हुए साफ अथवा कम गंदे पानी में प्रजनन करता है और अंधेरे, नम एवं छायादार स्थानों में पाया जाता है।

मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड लगकर तेज बुखार आना, यकृत एवं प्लीहा में वृद्धि, भूख में कमी, खून की कमी, कमजोरी, उल्टी और मितली आदि शामिल हैं। जांच एवं उपचार में देरी होने पर यह बीमारी गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निःशुल्क जांच एवं उपचार कराने की अपील की गई है।

मलेरिया की जांच एवं उपचार के लिए आवश्यक दवाएं और जांच किट आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला चिकित्सालय तथा मेडिकल कॉलेज में निःशुल्क उपलब्ध हैं। ग्राम स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मलेरिया सर्वे, जन-जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार भी नियमित रूप से किया जा रहा है। जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर अब तक 2,45,267 लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है।

जिला मलेरिया अधिकारी ने जनसमुदाय से अपील की है कि मलेरिया होने पर पर्याप्त आराम करें और तरल पदार्थों का सेवन करें। तले-भुने एवं गरिष्ठ भोजन से बचें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियां न उगने दें, कूड़ा-कबाड़ हटाएं और जलजमाव न होने दें। जलजमाव वाले पात्रों को नष्ट करें। रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा खुले बदन न सोएं और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।

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