जौनपुर लोकसभा क्षेत्र सदर – 73  में विपक्षी प्रत्याशी नदारत जौनपुर लोकसभा क्षेत्र सदर – 73  में विपक्षी प्रत्याशी नदारत

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निर्वाचन आयोग द्वारा 2024 के लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह के नाम की घोषणा कर दी है। कृपा शंकर सिंह जौनपुर जनपद के तेजी बाजार के शमीप के गांव सहोदरपुर के निवासी हैं। ये गत 3 वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। इसके पहले कृपा शंकर महाराष्ट्र में भारतीय कांग्रेस पार्टी के नेता रहे। इन्होंने अपने प्रभाव का विस्तार करके महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और काफी समय तक सफलतापूर्वक कार्य किया। बाद में इन्होंने महाराष्ट्र सरकार में भी गृह राज्य मंत्री के रूप में अपनी अच्छी भूमिका निभाई। कई अच्छे काम करके आपने अच्छी शोहरत पायी।  जौनपुर की स्थिति यह है कि यहां स्थानीय भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं का बहुल रहा है । उन दिनों जब सदर लोकसभा सीट से जहां चार-पांच बार ही कांग्रेसी पहुंचे हैं वहां सब विरोधी का ही बोलबाला रहा हैं ।

इस जनपद में एक वक्त था जब नगर और देहात के क्षेत्र में जनसंघ की प्रबलता के चलते 100 से ज्यादा आरएसएस की शाखाएं लगती रही और उन्हें पल्लवित और पोषित करने का काम राजा यादवेंद्र दत्त दुबे करते रहे। राजा इन्हीं स्वयंसेवकों के बल पर कई बार विधायक और दो बार सांसद भी हुए। यद्यपि पीढ़ियां गुजर गई हैं और राजा के 1999 में परलोकवासी होने के बाद आरएसएस को वैसा पोषण नहीं मिल सका फिर भी यहां और दलों की अपेक्षा भाजपा की स्थिति अच्छी रही है। कृपा शंकर एक अच्छे व्यक्ति हैं योग्य, अनुभवी और व्यवहार कुशल हैं । लेकिन इनका कार्यक्षेत्र मुंबई होने के नाते लोग इन्हें बाहरी कह रहे हैं।  पिछले दिनों जब से यह भाजपा में  उम्मीदवार बन कर आए इसके पूर्व में कई लोग प्रयास रत रहे हैं।

इनमें सबसे लोकप्रिय नाम ज्ञान प्रकाश सिंह का रहा है। ये दसियों वर्ष से जनपद में प्रत्येक समाज में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहे हैं । उन्हें सफलता भी मिली है लोग आज भी कह रहे हैं कि यदि ज्ञान प्रकाश सिंह को उम्मीदवार बनाया जाता तो बहुत अच्छा होता।

दूसरे प्रत्याशी हैं कृष्ण प्रताप सिंह जो 2014 में जौनपुर सदर से ही लोकसभा सदस्य रहे हैं 2019 में उनकी पराजय हुई। आप भाजपा के कद्दावर नेता रहे तथा जनपद में बेहद लोकप्रिय स्वर्गीय उमानाथ सिंह के सुपुत्र हैं । कृष्ण प्रताप का दावा रहा है कि अगर उनको अबकी बार टिकट मिलता तो जीत पक्की थी ।

तीसरे जो आज तक उम्मीदवारी के लिए प्रयास रत रहे, वे है भाजपा के जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह। आप कई वर्षों से जनपद में संगठन के प्रमुख हैं और जिले में पार्टी के विस्तार के लिए अच्छा काम कर रहे हैं । वह भी कृपा शंकर को टिकट मिलने से नाराज चल रहे हैं ।

चौथे व्यक्ति हैं केराकत के निवासी अभिषेक सिंह आईएएस । आप महाराष्ट्र में तैनात रहे हैं।  पिछले कुछ महीनो से अपने जनपद में पद से त्यागपत्र देकर आ गए हैं । राम मंदिर की स्थापना  तिथि 22 जनवरी 2024 के बाद  7 फरवरी 2024 से 7 मार्च 2024 तक

यहां के लोगों को बस द्वारा अयोध्या दर्शन करने के लिए लगातार प्रतिदिन भेजते रहे हैं।बस  प्रसिद्ध शक्तिपीठ शीतला चौकिया से यात्रियों को लेकर अयोध्या राम मंदिर जाती रही। वे बीच में लोगों को अपना नाश्ता पानी भी कराते रहे। अभिषेक सिंह का त्यागपत्र अभी हाल में सरकार द्वारा स्वीकृत भी कर लिया गया है इन्हें भरोसा था कि लोकसभा की उम्मीदवारी इन्हें जरूर प्राप्त होगी

पांचवें व्यक्ति हैं कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह। राजनीति की  शुरुआत अपने कांग्रेस के द्वारा चलाए गए 20 सूत्री कार्यक्रम के महामंत्री के रूप में किया। आप फिर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। लंबे समय तक आप कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रहे। बाद में विधायक हुए, फिर भाजपा में आ गए, फिर भाजपा को छोड़कर आपने सपा का दामन पकड़ लिया और इनका संबंध सपा के बड़े नेता शिवपाल सिंह से हो गया। आप लगभग एक दशक तक राज्य मंत्री स्तर के सपा में पदाधिकारी रहे। इस समय जौनपुर कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष है और भाजपा में सम्मिलित होकर लोकसभा की सदस्यता के लिए प्रत्याशी बनने का प्रयास करते रहे हैं ।जगह-जगह आपकी बड़ी-बड़ी होल्डिंक्स जिले में देखने को मिल रही है।

छठवें व्यक्ति हैं सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना। आप नरौली गांव के निवासी और टीडी कॉलेज में विधि महाविद्यालय के प्राचार्य पद पर तैनात है। आप माँ दुर्गा विद्यालय के महा प्रबंधक है । बहुत दिनों से भाजपा से जुड़े हैं पूर्व गृह राज्य मंत्री भारत सरकार स्वामी चिन्मयानंद से आपका काफी निकट संबंध रहा है। प्रदेश के भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी आपका जुड़ाव है। यह भी सदर संसदीय सीट से उम्मीदवारी चाहते थे किंतु पार्टी ने कृपा शंकर को प्रत्याशी बनाया।  इनके अलावा कई लोग ऐसे  हैं जिन्हें भी निराशा हाथ लगी है। ये सभी लोग अत्यंत प्रभावशाली हैं जिन्हें टिकट न मिलने से तकलीफ है यही कारण है की कृपा शंकर को अंतर विरोध से जूझना पड़ेगा।
जिले में इस संसदीय सीट के लिए विरोधी दल का कोई व्यक्ति नहीं आया है। इंडी गठबंधन से कोई प्रत्यासी नही है।

और एक व्यक्ति का नाम आम जनता में है, वह है पूर्व सांसद धनंजय सिंह, वे एक आपराधिक पृष्ठभूमि के रहे हैं किंतु पिछले एक दशक से इन्होंने अपने को एक अच्छे व्यक्ति के रूप में साबित करने में लगे है।

इनके ऊपर तमाम आपराधिक मुकदमे होने के साथ ही उनकी छवि एक दबंग माफिया की रही है जिसे अपने व्यवहार से मिटाने का इन्होंने पूरा प्रयास किया है।

दुर्भाग्य से धनंजय सिंह इस समय एक अपहरण के  मुकदमे में 7 वर्ष की सजा पाकर जिला कारागार में बंद है। अभी यह जमानत के लिए प्रयास कर रहे हैं यदि इन्हें अवसर मिलेगा तो यह भी किसी दल से अथवा स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार होंगे। स्थिति इनकी ऐसी नहीं है कि इन्हें विजय मिलेगी ही लेकिन कृपा शंकर की स्थिति को यह खराब कर सकते हैं।
कहावत चरितार्थ होगी कि –

        “न खेलब, न खेले देब, खेलवे बिगाड़ब !”

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