अब तो पत्रकार बताने में अपने को शर्म लगती है।
जौनपुर। पत्रकारिता क्षेत्र में पाँच दशक से जुड़े कैलाश नाथ मिश्र ने पत्रकारिता की दुर्दशा पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि –
” अब तो अपने आप को पत्रकार कहने में शर्म लगती है।” कैलाश नाथ हिंदी न्यूज वेब पोर्टल तीसरी आंख कार्यालय में आहूत गोष्ठी में अपना विचार व्यक्त कर रहे थे।
तीसरी आंख के संपादक श्याम नारायण पांडे ने कहा कि – “यद्यपि आज समाज के हर तबके में गिरावट आई है शिक्षा जैसा पवित्र क्षेत्र बहुत ही गिर चुका है।” इसके साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र, न्याय क्षेत्र, प्रशासनिक क्षेत्र, व्यावसायिक क्षेत्र आदि कोई भी अछूता नहीं है। कोई व्यक्ति किसी के ऊपर उंगली उठाने का साहस नहीं कर सकता।
सर्वे गुणा का कचनम आश्रयन्ति ही जीवन का आदर्श सिद्धांत बन चुका है।
मुन्ना शुक्ला ने कहा कि – “गिरावट ही नहीं देखना है बल्कि सुधार भी किया जाना चाहिए।”
पंडित राजेश पांडे ने कहा कि- “शिक्षक दिवस जैसे पवित्र दिन पर कम से कम शिक्षा से जुड़े लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि पठन – पाठन की व्यवस्था अच्छी हो।”
गोष्ठी का संचालन श्याम नारायण पांडे ने किया।
इस लघु गोष्ठी में सर्वश्री राजेश पांडेय, राम समुझ शुक्ला (मुन्ना शुक्ला), श्याम नारायण पाण्डेय, सुधाकर शुक्ला, दीपक मिश्रा, विवेक कुमार श्रीवास्तव (संजय), मायाराम यादव, रवि कान्त आदि लोग सम्मिलित हुए।












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