गांव के लोगों की दुर्दशा पर विचार व्यक्त करते हुए समाजसेवी वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि–
जौनपुर। आज गांव देहात की जनता प्रतिदिन शहर का दौड़ लगा रही है क्योंकि सारा काम शहर से ही होना है। हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत ही ईमानदार हैं लेकिन जाकर जौनपुर तहसील से एक दाखिल खारिज बिना पैसा दिए करवा दें तो मैं जानू .?
सैकड़ो लोग प्रतिदिन जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है बरसों से अपना नाम चढ़ाने के लिए दौड़ रहे हैं अगर वह कुछ कड़ी बात कहते हैं तो तहसीलदार उनके घर पर बुलडोजर चलाने की धमकी देते हैं और उस पीड़ित व्यक्ति को ढोकरिया करके भगा देते हैं।

अगर आपको अपने कृषि क्षेत्र की नापी करानी है तो लेखपाल से लेकर उप जिलाधिकारी तक दर के अनुसार पैसा दीजिए, साथ ही हाथ जोड़कर प्रार्थना करिए तब कहीं आपको न्याय मिल सकता है।
यही स्थिति विकास भवन की है यहां डेढ़ दर्जन से ज्यादा विभाग है एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की छत्रछाया में सारे अधिकारी स्वयं का विकास करने में लगे हैं। आप कोई पेंशन या प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि का ही प्रार्थना पत्र देकर के उस पर कार्रवाई कराना चाहे तो प्रैक्टिकली उसे देखिए। बगैर पैसा दिए समाज कल्याण विभाग से आपका कोई काम नहीं होगा। यह विभाग विधवाओं और विकलांगों को भी नहीं छोड़ता। आप किसके यहां गुहार लगाइएगा .?
जिले के सबसे बड़े अफसर तो डीएम साहब हैं। शहर की सड़कों की त्वरित मरम्मत के लिए लिखा पढ़ी में कई बार निर्देश – आदेश दे चुके हैं। लोक निर्माण विभाग उनकी सुनता ही नहीं।
जिले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के 9 विधायक और 3 सांसद हैं। ये जिले के मगरूर अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते अथवा ये जनप्रतिनिधि जनता के कामों में रुचि ही नहीं लेते क्योंकि लोकसभा एवम् विधानसभा में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जनहित में सवाल उठाते कभी देखा भी नहीं गया है।
वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि यह प्रश्न उठता है कि क्या किया जाए ?
- किस-किस को खबर कीजिए किस-किस पर रोइए ?
आराम बड़ी चीज है, मुंह ढक कर सोइए।












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