जौनपुर। वर्ष 1988- 89 में इंडियन एक्सप्रेस का हिंदी संस्करण जनसत्ता जब मुंबई से प्रकाशन प्रारंभ किया तो पूर्वी उत्तर प्रदेश से उसे एक अच्छा पत्रकार चाहिए था, जो प्रभावशाली भी हो और योग्य भी हो। अखबार ने खबरों की व्यवस्था हेतु हेमंत शर्मा जी को नियुक्त किया। उसी में सुल्तानपुर से राज खन्ना, फैजाबाद त्रियुग नारायण तिवारी, गाजीपुर से जयप्रकाश भारती, जौनपुर से स्वयं मैं श्याम नारायण पांडे और बहुत से लोगों को हेमंत जी ने स्वयं तैनात किया।
एक तत्कालीन एमएलसी को साथ लेकर हेमंत शर्मा मुझे खोजते हुए ओलंदगंज में साधू पांडे की चाय की दुकान पर आए,जो समाजवादियों का अड्डा भी थी। आपने कैलाश नाथ मिश्रा (संवाददाता जनमोर्चा) से पूछा कि – श्याम नारायण कहां है, कब मिलेंगे ?
थोड़ी देर में मैं पहुंच गया। आपने अखबार के बारे में पूछा, तब तक मेरा आधा दर्जन से ज्यादा बाई लाइन समाचार जनसत्ता में प्रकाशित हो चुका था। इसी वक्त आपने हमें मुंबई समाचार भेजने के लिए टेलीग्राफिक कार्ड और अधिकार पत्र भी दे दिया। मैं मुंबई के लिए जनसत्ता का संवाददाता बन गया। उसी वक्त जनसत्ता के लखनऊ संवाददाता जयप्रकाश शाही जनसत्ता छोड़ दिए, फिर हेमंत जी को अखबार ने जनसत्ता का मुख्य संवाददाता बनाते हुए लखनऊ तैनात कर दिया और हम लोग दिल्ली जनसत्ता के लिए भी खबरें भेजने लगे।
अच्छे व्यवहार के कारण हम लोग पारिवारिक सदस्य हो गए। कोई भी सुख – दुख का अवसर रहा हो, हम लोग दशकों आपके साथ रहे। परिवार में स्व० माताजी, श्रद्धेय पिताजी और शरद भईया का भी आशीर्वाद मिलता रहा।
जनसत्ता पर एक ऐसा मुकदमा हुआ जिसमें दिल्ली के बड़े संपादक और लखनऊ कार्यालय के स्टेट हेड हेमंत शर्मा पर भी नान- वेलेबल वारंट हो गया। यह वारंट तो मुझ पर भी था लेकिन विरोधी पार्टी ने हमारे वारंट को दबवा दिया था ताकि हमें मालूम न हो। अचानक उसी दिन टेलीफोन करके हेमंत शर्मा और दिल्ली के अधिकारी हमारे आवास पर आए। और दीवानी चलने की बात करने लगे। मैंने अपने वकील रत्नेश तिवारी को बुलवाया और उनको वारंट की कॉपी दी गई। उन्होंने एक तारीख ले लिया फिर उसके बाद मुकदमों की पैरवी स्वयं करने लगे। अंत में मुकदमे में अखबार की जीत हुई हमारे वकील रत्नेश तिवारी को हेमंत जी ने लिखित रूप से आशीर्वाद भेजा फिर रत्नेश जी भी उनसे जुड़ गये।
हेमंत जी के अच्छे व्यवहार के चलते उनके प्रत्येक सुख – दुख में मैं तो रहता ही रहा, कैलाश नाथ मिश्रा और रत्नेश तिवारी भी साथ रहते रहे।
इलेक्ट्रानिक मीडिया टीवी 9 भारतवर्ष में निर्देशक पद पर तैनात होने के बाद हेमंत जी की व्यस्तता बढ़ गई है। भेंट तो कम हो पाती हैं लेकिन अपने स्वभाववश वे खोज खबर लेते रहते हैं।
आज चौसठवे जन्मदिन पर उन्हें हृदय से बधाई देते हुए प्रिय – प्रवास की पंक्तियों को दोहराना चाहता हूं –
प्यारे जीवे जग हित करै
गेह चाहे न आवें।
श्याम नारायण पाण्डेय












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