वाराणसी। विश्व बाल दिवस पर UPCEG, SARC और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट का संयुक्त अभियान: 300 किशोरियों को साइबर क्राइम से सुरक्षित रहने का प्रशिक्षण।
विश्व बाल दिवस (World Children’s Day) के अवसर पर, सोशल एक्शन एंड रिसर्च सेंटर (SARC), UPCEG उत्तर प्रदेश ने वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के सहयोग से आज वसंत कन्या इंटर कॉलेज, कमच्छा में किशोरियों के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम “साइबर क्राइम: पहचानें और सुरक्षित रहें” का आयोजन किया।
कार्यक्रम में 500 से अधिक किशोरियों ने भाग लिया।
इस जागरूकता अभियान के मुख्य वक्ता, सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम एवं साइबर सुरक्षा विभाग) श्री विदुष सक्सेना जी थे।
SARC की सचिव, सुश्री रंजना गौड़ ने इस अवसर पर कहा, “विश्व बाल दिवस बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और विकास को समर्पित है। आज के डिजिटल युग में, बच्चों को साइबर खतरों से बचाना उनके सुरक्षा के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। पुलिस कमिश्नरेट के साथ हमारा यह सहयोग सुनिश्चित करता है कि हमारी बेटियाँ न केवल शिक्षित हों, बल्कि डिजिटल रूप से सुरक्षित भी रहें।” उन्होंने बताया कि साइबर अपराध (Cyber Crime) वे अपराध हैं जो कंप्यूटर, इंटरनेट, या अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके किए जाते हैं। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले प्रमुख साइबर अपराधों में उनकी गोपनीयता, सम्मान और सुरक्षा को लक्षित किया जाता है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री विदुष सक्सेना जी ने सरल भाषा में बालिकाओं को साइबर फ्रॉड, फ़िशिंग (Phishing) और ऑनलाइन बुलिंग , आर्थिक धोखाधड़ी, डिज़िटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग जैसे खतरों के बारे में विस्तार से समझाया।
उन्होंने किशोरियों को सुरक्षित पासवर्ड बनाने, अवांछित लिंक पर क्लिक न करने, और सोशल मीडिया पर अपनी गोपनीयता सेटिंग्स (Privacy Settings) को मजबूत रखने के लिए व्यावहारिक टिप्स दिए।
ACP विदुष सक्सेना जी ने बड़े स्क्रीन पर हर तरह साइबर अपराध जैसे – साइबर स्टॉकिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग, ऑनलाइन उत्पीडन एवं ब्लैकमेलिंग, डॉक्सिंग, मॉर्फिंग, डिज़िटल फ्राड, डिजिटल अरेस्ट, आर्थिक धोखाधड़ी, आन लाइन शोपिंग में धोखाधड़ी, नौकरी दिलाने के नाम पर फ्राड, मोबाइल का कैमरा तथा माइक्रोफोन की हैकिंग, साइबर अपराध में AI का उपयोग आदि का उदहारण देकर विषय को और आसन बनाकर दिया।
उन्होंने संचार साथी एप के द्वारा बताया कि- कैसे आपके आधार पर एक से अधिक मोबाइल नंबर जारी किये गए है जिसका ग्राहक को पता भी नहीं होता. और उन नम्बरो से अपराध किये जाते है। ये किसी के लिए खरनाक हो सकता है. साथ ही उन्होंने किसी भी ऑनलाइन खतरे का सामना करने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल तथा 1930 पर शिकायत दर्ज करने का तरीका भी बताया।
यह पहल उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा के अनुभव और SARC के सामाजिक कार्यों के समन्वय का एक शानदार उदाहरण है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों को सशक्त बनाना है ताकि वे ऑनलाइन दुनिया में विश्वास और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जहाँ बालिकाओं ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अपने संदेहों को दूर किया।
