के०के० गोयनका का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति

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जौनपुर: देश के जाने-माने साहित्यकार कमल किशोर गोयनका के निधन की खबर सुनते ही वैश्विक स्तर पर साहित्य जगत शोकाकुल है। वहीं सिविल लाइन्स स्थित तीसरी आंख न्यूज पोर्टल में शोक सभा का आयोजन किया गया।
सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार व तीसरी आंख के प्रधान संपादक श्याम नारायण पाण्डेय ने कहा कि साहित्यकार कमल किशोर गोयनका की करीब 130 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और प्रेमचंद के साहित्य पर उन्होंने काफी काम किया है। वे कई साल केंद्रीय हिंदी संस्थान, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार में बतौर उपाध्यक्ष रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कैलाश मिश्र ने बताया कि उनका जीवन संत की तरह रहा है। परिजनों के मुताबिक जीवन में उन्होंने कई युवाओं की पढ़ाई पूरी कराने में भी योगदान दिया है।
प्रख्यात साहित्यकार डॉ० ब्रजेश कुमार यदुवंशी ने कहा कि कमल किशोर गोयनका जी के निधन का समाचार अत्यंत स्तब्ध करने वाला है। उनका जाना न केवल हिंदी साहित्य जगत, बल्कि संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
डॉ यदुवंशी ने आगे बताया कि डॉ. गोयनका ने प्रेमचंद पर पीएचडी व डी. लिट करके देश में इकलौते शोधार्थी होने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने प्रेमचंद के हजारों पृष्ठों के लुप्त व अज्ञात साहित्य को खोजकर सहेजा है।
उन्होंने प्रेमचंद के मूल दस्तावेजों, पत्रों, डायरी, बैंक पासबुक, फोटोग्राफ, पांडुलिपियों की तीन हजार वस्तुओं का संग्रह भी किया है। केंद्र सरकार के सहयोग से 1980 में ‘प्रेमचंद शताब्दी’ पर देश-विदेश में ‘प्रेमचंद प्रदर्शनी’ कराई। साथ ही एक फिल्म भी बनवाई। मॉरिशस के महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट द्वारा 1989, 19941996 में प्रेमचंद पर कई गोष्ठियां कराई।
इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो० राघवेन्द्र प्रताप सिंह, सभा नारायण चौबे एडवोकेट, विपिन कुमार सिंह, मायाराम यादव, विजय शंकर मिश्र, रवि कान्त, अजय पांडेय आदि उपस्थित रहे।

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