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भारतीय संविधान

इतिहास

प्रारूप समिति के अध्यक्ष

वर्ष 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हो गया तब देश को चलाने के लिए अपना कानून नहीं था। आवश्यकता थी कि एक अपना श्रेष्ठ और देश काल तथा परिस्थितियों के अनुसार कानून बनाया जाए इसके लिए दुनिया के प्रमुख देशों जैसे – ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, आयरलैंड, जर्मनी, सोवियत संघ, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, जापान आदि देशों के संविधान का अध्ययन कर देश का वर्तमान संविधान बनाने की शुरुआत की गई इसके लिए सर्वसम्मति से संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 में किया गया।

           संविधान सभा के गठन का विवरण-

संविधान सभा के लिए सदस्यों के चयन की कार्यवाही हुई जिसमें 292 ब्रिटिश प्रान्तो के प्रतिनिधि, 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्र से एवं 93 देश की रियासतों के प्रतिनिधि थे। इसमें सदस्यों की कुल संख्या 389 नियत की गई थी। प्रतिनिधित्व तीन समुदायों मुस्लिम, सिख और साधारण लोगों में विभाजित किया गया था।
अब संविधान सभा में ब्रिटिश प्रान्तों के 296 सामान्य वर्ग के 213 मुसलमान वर्ग के 79 और सिख समुदाय के चार सदस्य चुने गए।  अनुसूचित जाति एवं जनजाति के 33 और महिला सदस्यों की संख्या 12 रखी गई थी।

संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष

11 दिसंबर 1946 को डॉ० राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष चुने गए। संविधान सभा की कार्यवाही 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किए गए उद्देश्य प्रस्ताव के साथ शुरू हुई। 29 अगस्त 1947 को डॉ० भीमराव अंबेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया।  देश का बंटवारा हो जाने के बाद सविधान सदस्यों की संख्या घटकर 324 नियत की गई । अंत में सदस्य संख्या और घटी जिसके अनुसार 31 दिसंबर सन 1947 को संविधान सभा की कुल संख्या 299 रह गई थी जिसमें प्रांतीय सदस्यों की संख्या 229 और देशी रियासतों के  सदस्यों की संख्या 70 थी।
प्रारूप समिति ने संविधान के प्रारूप पर विचार करने के बाद 21 फरवरी 1948 को संविधान सभा की अपनी                 रिपोर्ट प्रस्तुत की संविधान सभा का

प्रथम वाचन-  4 नवंबर से 9 नवंबर 1948 तक चला। 
दूसरा वाचन- 15 नवंबर से 17 अक्टूबर 1949 तक चला ।
तीसरा वाचन-   14 नवंबर 1949 को प्रारंभ हुआ और 26 नवंबर 1949 तक चला।  अर्थात अंत तक चला इसके वाचन के साथ ही संविधान सभा द्वारा संविधान को पूर्ण रूप से पारित कर दिया गया। इस समय संविधान सभा में  294 सदस्य उपस्थित थे ।

                  संविधान निर्माण में समय

संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष 11 महीना 18 दिन लगे और संविधान निर्माण के इस कार्य में कुल 64 करोड रुपए खर्च आया था। संविधान को संविधान के प्रारूप पर 114 दिन बहस हुई। इस प्रकार 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को पारित कर दिया गया।

संविधान सभा की प्रमुख समितियां

    संविधान सभा की प्रमुख 6 समितियां बनाई गई।
1. संचालन समिति –  अध्यक्ष-  डॉ राजेंद्र प्रसाद
2. संघ संविधान समिति –  अध्यक्ष –
    पंडित जवाहरलाल नेहरू
3. प्रांतीय संविधान समिति – अध्यक्ष- 
    सरदार वल्लभ     भाई पटेल
4. प्रारूप समिति – अध्यक्ष – डॉ० भीमराव अंबेडकर
5. झंडा समिति – अध्यक्ष- जानकी वल्लभ कृपलानी
6. संघ शक्ति समिति – अध्यक्ष-
    पंडित जवाहरलाल नेहरू

संविधान की प्रस्तावना

हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण से समप्रभुता संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा इन सब में व्यक्ति को गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुरक्षित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित, आत्मपित करते हैं।

नोट:-   मूल संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी  धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा इमरजेंसी के समय 1976 में जोड़ दिया गया था। यह शब्द संविधान की प्रस्तावना में मूल प्रारूप से नहीं था।

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