डीएम के नाम पर घूस मांगने वाला इंस्पेक्टर आदित्य

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जौनपुर: प्रदेश की नौकरशाही ने लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस की नीति को धूल- धूसरित घोषित करते हुए शासन को यह चुनौती दे दिया है कि हम अपने धर्रे पर ही चलेंगे। हम आपके अनुशासन को जूते की नोक पर रखते हैं?

मामला जलालपुर से थानागद्दी मार्ग पर स्थित चौरी बाजार की एक देशी शराब की दुकान का है जिसका लाइसेंस सुमन सिंह पत्नी राकेश कुमार सिंह के नाम से है।

इस क्षेत्र के आबकारी इंस्पेक्टर आदित्य सिंह स्वभाव से पुराने जमाने के जमींदारों जैसा व्यवहार करते हैं। आपने अपने क्षेत्र की सभी दुकानों से एक अच्छी रकम प्रति माह बांध रखी है और आकस्मिक रूप से जब जांच पड़ताल पर निकलते हैं तो मनमानी वसूली जबरदस्ती कर लेते हैं। दुकानदार लोग थोड़ा विरोध करते हैं तो फिर उन्हें धमकी देने लगते हैं कि – मैं तुम्हारे खिलाफ एफ.आई.आर. कर दूंगा।

एक दिन इंस्पेक्टर आदित्य ने चौरी बाजार के लाइसेंसी श्रीमती सुमन सिंह के पति राकेश कुमार सिंह को अपने सिपाही शुजावुद्दीन के मोबाइल से जिसका नंबर 7985042356 है, फोन किया कि एक आकस्मिक खर्च आ गया है डी.ई.ओ. साहब की तरफ से हैं तथा डीएम साहब का आदेश है कुल ₹60000 का खर्चा है आपको केवल 1800 रुपए देना है।
राकेश कुमार सिंह ने संबंधित आबकारी विभाग के प्रदेश आयुक्त को एक शिकायती पत्र लिखकर के भेज दिया जिसमें उन्होंने टेलीफोन वार्ता की बात भी बता दिया, जिसे राकेश कुमार ने अपने मोबाइल में सुरक्षित कर लिया है।


बस – विभाग में तूफान आ गया। भ्रष्ट इंस्पेक्टर आदित्य सिंह राकेश कुमार को धमकी देने लगा कि मैं आपकी पत्नी के नाम से जो लाइसेंस की दुकान है उसे निरस्त करा दूंगा। तुम्हारी पत्नी को संगीन दफाओं में जेल भिजवा दूंगा जिसमें जमानत होना बहुत मुश्किल हो जाएगा।


दुकान के बाबत जमा बंधक धनराशि भी जप्त करा दूंगा किंतु इन सब धमकियों का राकेश कुमार सिंह पर कोई असर नहीं पड़ा।
अब इंस्पेक्टर आदित्य कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह के नजदीकी मित्रों और शुभचिंतकों के यहां सोर्स लगाने लगे हैं।
अब आबकारी विभाग ने राकेश कुमार के शिकायती पत्र पर ऊपर से नीचे तक लीपा- पोती करना शुरू कर दिया हैं।


यह मामला अब जनपद के राजनीतिज्ञों,जनपद के व्यवसायियों, जनपद के बड़े कालेजों के छात्र संघ के नेताओं, जनपद के मीडिया कर्मियों, आरटीआई में काम करने वाले वकीलों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संभव है कि यह प्रकरण जल्दी ही प्रदेश की विधानसभा या विधान परिषद की बैठक में भी उठाया जाए।

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