जौनपुर के DM का बेतुका बयान, बोले – ये कोई बड़ी बात नहीं” PWD करोड़ों का काम करती है, 25- 30 लाख के छोटे मामले पर सरकार की छवि न खराब करें
उजौनपुर: जिले में भ्रष्टाचार का अनोखा मामला सामने आया है. यहां पीडब्ल्यूडी ने एक ऐसी सड़क के लिए बिल का भुगतान कर दिया है, जो वास्तव में बनी ही नहीं. इस मामले में ना केवल 26.58 लाख रुपए के फर्जी बिल का भुगतान किया गया था, बल्कि जेई से लेकर एसडीओ तक ने इस सड़क का फर्जी निरीक्षण कर ओके की रिपोर्ट भी लगाई थी. चूंकि इस सड़क का बजट विधायक निधि से जारी हुआ था, इसलिए विधायक ने खुद ही भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर भी किया. बड़ी बात यह कि मामला उजागर होने के बाद जिले के डीएम ने बेतुका बयान देते हुए इसे मामूली बात बता दिया।
मामला जौनपुर में मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र का है. यहां सपा विधायक पंकज पटेल ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में अपने विधायक निधि से सुजान गंज ब्लॉक में 2300 मीटर लंबे शिवरिहा संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था. पीडब्ल्यूडी ने विधायक के प्रस्ताव पर स्वीकृति देते हुए टेंडर जारी कर दिया और फिर कुछ दिन बाद इस सड़क का काम कंपलीट बताकर ठेकेदार को 26.58 लाख रुपये का भुगतान कर दिया. इसी बीच गांव के लोग इस सड़क की मांग को लेकर फिर विधायक के पास चले गए.
शिकायत के बाद बनी सड़क
विधायक ने जब उनसे कहा कि यह सड़क बन चुकी है तो ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक मिट्टी तक नहीं पड़ी. यह सुनकर विधायक हैरान रह गए. वह खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति देखने के बाद प्रमुख सचिव को शिकायत दी और मौके पर हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद हरकत में आए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क तो बनवा दी, लेकिन जब इस संबंध में डीएम से पूछा गया तो उन्होंने बेतूका बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी करोड़ों का काम करता है. इसलिए छोटी मोटी गलतियां हो जाती हैं.
DM का बेतुका बयान :
डीएम ने कहा कि इस मुद्दे को तूल देकर सरकार की छवि को खराब करना ठीक नहीं है. हालांकि डीएम दिनेश चंद्र सिंह ने खुद स्वीकार भी किया कि गलती हुई है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जेई समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ एक्शन के लिए सरकार को रिपोर्ट भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह छोटी सी गलती है, इसलिए इस मामले में सरकार की अलोचना नहीं होनी चाहिए.
उधर, विधायक पंकज पटेल ने कहा कि यह इकलौता मामला नहीं है. जिले में 50 से अधिक ऐसी सड़कें हैं, कागजों में बन चुकी हैं और उनका भुगतान भी हो चुका है।
