योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठाते हुए वरिष्ठ समाजसेवी वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि- योगी जी के कुछ कार्य तो ठीक हैं किंतु एक ओर बाबा इतिहास बना रहे हैं और दूसरी ओर उनके उच्च अधिकारी भूगोल ही गायब कर रहे हैं। वर्ष 2027 में क्या होगा यह भगवान ही जाने?
वशिष्ठ नारायण ने कहा कि- उत्तर प्रदेश के सरकारी सेवक वह चाहे उच्च स्तरीय अधिकारी हो या कर्मचारी सब बेलगाम हो गए हैं। किसानों को इस समय जो बिजली मिल रही है उसका तो भगवान ही मालिक है।इस समय धान की सिंचाई का समय चल रहा है और गर्मी इतनी बढ़ गई है की एक दिन सिंचाई होती है तो 2 दिन में खेत सूख जाता है। बिजली प्रतिदिन कब कटेगी, कितनी देर तक कटेगी, इसका कोई निश्चय नहीं है।
इस बारे में एक काश्तकार एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बिजली विभाग से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह तो योगी ही बता पाएंगे कि बिजली कब आएगी कितनी और कितनी देर तक रहेगी?

तिलकधारी पीजी कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने यही बातें वर्तमान जिलाधिकारी को बताया और उनसे कार्यवाही के लिए कहा तो डीएम साहब खामोश हो गए।
किसानों के लिए दूसरी समस्या रासायनिक खाद की है। जब खाद की जरूरत होती है तो उन्हें खाद नहीं मिलती। खाद आती तो है लेकिन समितियां तक पहुंचाने के पहले ट्रक सहित वह प्राइवेट दुकानदारों के यहां पहुंच जाती है और जब यूरिया और डीएपी खाद के बारे में सहायक रजिस्ट्रार और कृषि उपनिदेशक एवं कृषि अधिकारी से पूछा जाता है तो वह सब मोनी बाबा हो जाते हैं।
इस समय मामला धान क्रय केंद्र का चल रहा है। किन साधन सहकारी समितियां को यह जिम्मेदारी दी जाएगी? इसकी सूची बन रही है। बताया गया है कि सब कुछ हो चुका है जिस समिति के सचिव ए० आर० कार्यालय से मिल लिए हैं, उनका नाम तो क्रय केंद्र की सूची में आ गया है बाकी सब टॉय टॉय फिस।
धर्मापुर विकासखंड की समितियां में एक बड़ी समिति है साधन सहकारी समिति रतीपुर। ए० आर० कार्यालय से इसके सेक्रेटरी नहीं मिल पाए। अब इनको कह दिया गया है कि इनकी समिति को धान का क्रय केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
यह किसानों से संबंधित कुछ बिंदु है फिर भी भाजपाई ऐसा कह रहे हैं की पार्टी का भविष्य उज्जवल है।
