आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया भाई दूज का पर्व

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बहनों की भाईयों के लम्बी उम्र की कामना, खिलाया प्रसाद

जौनपुर। भाई दूज (जिसे भैया दूज या भाऊ बीज भी कहते हैं) हिन्दू धर्म का एक पवित्र पर्व है जो दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। भाईदूज का पर्व बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। बहनों ने अपने भाई को तिलक लगाकर श्रीफल भेंट किया। वही भाई ने भी अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। बहनों ने अपने भाइयों के सिर पर तिलक लगाया एवं उनके दीर्घायु होने की कामना की। इससे पहले जगह-जगह गोधन कूटने की परंपरा का निर्वहन भी किया गया। हांलाकि यह त्योहार इस बार ग्रह नक्षत्र व पंचांग के बीच उलझ कर दो दिनों तक मनाया। कुछ लोगों ने बुधवार को मनाया तो क्षेत्र में आज यानी गुरूवार को मनाया जायेगा। हिन्दू मान्यता के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नदी व सरोवर में स्नान का विशेष महत्व होता है।

इसी दिन हर भाई अपना महत्वपूर्ण कार्य छोड़ अपनी बहनों के पास जाते हैं और भाई दूज की मानक परंपरा का निर्वहन करते हैं। भैया दूज की तैयारी बहनों ने सुबह से की थी। ज्ञात हो कि भाई दूज का पर्व पौराणिक कथा अनुसार देवी यमुना ने अपने भाई यमराज की पूजा-अर्चना कर मनाया था। जिसमें बहन यमुना ने अपने भाई यमराज से आशीर्वाद स्वरुप यह वरदान मांगा था कि मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका लगाए, उसे तुम्हारा भय ना रहे। पौराणिक कथा में बताया जाता है कि इस पर्व का महत्व और लक्ष्य बहन भाई के पावन संबंध और समाज में प्रेम भाव की स्थापना करना है। गोधन कूटने के बाद बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और आरती उतारी। बाद में उनकी कलाइयों पर कलावा बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई। भाइयों की लंबी उम्र की मिन्नत मांगते हुए हर वर्ष भैया दूज के अवसर पर उनकी उपस्थिति का वचन भी लिया है।

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