जौनपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषक छुट्टा जानवरों से बेहद परेशान हैं इन लोगों पर वर्तमान सरकार की निगाह नहीं है आखिर इस खामोशी का क्या कारण है?
यह सवाल समाजसेवी- वशिष्ठ नारायण सिंह ने वर्तमान सरकार से पूछा है। उन्होंने कहा है कि किसानों के हित के लिए सरकार खामोश है जबकि सरकार का नारा है – सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।
इस मनोहरी नारे में सबका विकास में किसान नहीं आते क्या?
सरकार छुट्टा पशुओं के लिए क्यों कोई स्थाई समाधान नहीं निकाल रही है ताकि किसानों की फसले इन जानवरों से बचाई जा सके। सरकार घोड़े की नस्ल वाले पशु नीलगाय को गोवंश की श्रेणी में बता रही है अच्छी बात है, तो उनके लिए भी गौशालाओं की जगह नीलगायों का एक शाला बनवाने की व्यवस्था कर दी जाए।

वशिष्ठ नारायण ने बताया कि- “जहां भी गौशालाएं हैं आप लोग वहां से गुजर नहीं सकते, क्योंकि पूरे क्षेत्र में बदबू फैली रहती है। इसका कारण यह है कि गौशालाओं का प्रबंध जिन प्रधानों के ऊपर छोड़ा गया है वह उनका चारा भी बांट करके खा जा रहे हैं। जब चारें बगैर ये गाये मरने लगती हैं तो प्रधान इन्हें आसपास ही जमीन में गाड़ देते हैं और पूरे क्षेत्र में बदबू फैल जाती है।”
वर्तमान रवी की फसल के लिए कृषक बहुत बेहाल रहे। कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे इन्हें आराम से खाद और बीज मिल सके। जिन संस्थाओं को उसके लिए जिम्मेदारी दी गई है वह हैं साधन सहकारी समितियां और विकास केंद्रों पर स्थित बीज और खाद गोदाम।
यहां जाने पर आप किसानों में कपार फुटौव्वल बड़े आराम से देख सकते हैं।
जब सरकारी अधिकारी व्यवस्था नहीं कर सकते हैं तो इन वस्तुओं को बाजार में फ्री कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांव में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है लेकिन मनरेगा के नाम पर करोड़ों रुपए की बंदर बांट पिछले कई दशक से हो रही है तमाम जनहितकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चल रही हैं सरकार अपने सारे प्रयास अपने मत को लुभाने में कर रही है वह भी जहां-जहां शीघ्र ही चुनाव होने वाले हैं।
अभी केंद्र सरकार ने मतदाताओं को लुभाने के लिए रिजर्व बैंक आफ इंडिया से बड़ी मात्रा में कर्ज लिया है और इन्हें वह बांट रही है। यह शर्मनाक ही है।
अंत मे आपने कहा है कि पूर्वांचल के कृषक बहुत परेशानी में है किंतु सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है यह आश्चर्य है?
