जौनपुर। अटाला मस्जिद परिसर के दुकानों को अतिक्रमण बताते हुए संतोष मिश्रा की ओर से रिट-सी याचिका दाखिल किया गया था
याचिका में कहा गया है कि अटाला जामा मस्जिद का विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है और इसकी देखरेख लंबे समय से एएसआई द्वारा ही की जाती रही है।
लेकिन उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से बिना एएसआई की अनुमति के मस्जिद परिसर में 50 से अधिक दुकानों का अवैध निर्माण कराया गया है। और बड़ी बात यह है कि इन दुकानों का किराया भी वक्फ बोर्ड द्वारा ही वसूला जा रहा है।
ऐसे में आपको बता दें कि अब इस याचिका में दुकानों को तत्काल ध्वस्त करने का आदेश जारी करने की मांग की गई है।
वहीं एएसआई ने अपने जवाब में विवादित परिसर को अटाला जामा मस्जिद के साथ अटला देवी मंदिर परिसर का हिस्सा बताया है। एएसआई का कहना है कि परिसर में धार्मिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और पूरे क्षेत्र में आमजन के लिए निःशुल्क प्रवेश है।
और इसी मामले को लेकर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह मामला जनहित से जुड़ा ऐसे में इसकी सुनवाई PIL के रुप में किया जाएगा।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए मामले को चीफ जस्टिस की कोर्ट को संदर्भित कर दिया। अब इस प्रकरण की सुनवाई 19 दिसंबर को चीफ जस्टिस द्वारा नामित पीठ के समक्ष होगी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, एएसआई संरक्षित परिसर में बिना अनुमति निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि दुकानों का आवंटन नीलामी प्रक्रिया अपनाए बिना, भेदभावपूर्ण तरीके से एक वर्ग विशेष को मनमाने ढंग से किया गया है। जो सही नहीं है।
अब इस मामले में यूनियन ऑफ इंडिया, महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अधीक्षक पुरातत्वविद्, जिलाधिकारी जौनपुर, एसएसपी जौनपुर और वक्फ अटाला जामा मस्जिद को प्रतिवादी बनाया गया है।
अब ऐसे में कहीं न कहीं हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सबकी निगाहें 19 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले की दिशा और दशा दोनों तय होने की संभावना है।












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