जौनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिरकोनी में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार की अध्यक्षता में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का फाइलेरिया रोग एवं रुग्णता प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव एवं डीसी पाथ अमरेश कुमार ने फाइलेरिया के कारण, लक्षण, बचाव, जांच, उपचार तथा रुग्णता प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान तीन फाइलेरिया मरीजों को रुग्णता प्रबंधन, व्यायाम एवं साफ-सफाई की जानकारी देकर एमएमडीपी (MMDP) किट वितरित की गई। किट एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर मरीजों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
जिला मलेरिया अधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि यदि उनके आसपास हाथीपांव (लिम्फोडिमा) से पीड़ित कोई मरीज हो तो उसे निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर अथवा जिला मलेरिया एवं फाइलेरिया कार्यालय (टीबी हॉस्पिटल परिसर) भेजने के लिए प्रेरित करें, ताकि उसे जांच, उपचार, परामर्श और रुग्णता प्रबंधन की सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने बताया कि जनपद में फाइलेरिया के 5,270 मरीज चिन्हित हैं। वर्ष 2025 में सभी 5,270 मरीजों तथा वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक 2,590 मरीजों को एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।
नोडल अधिकारी डॉ. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है। इससे हाथ, पैर, स्तन अथवा अंडकोष में सूजन आ सकती है तथा कुछ मामलों में पेशाब के साथ सफेद द्रव (कायलुरिया) भी निकलता है। इसके लक्षण 5 से 15 वर्ष बाद तक प्रकट हो सकते हैं। रोग से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा तथा वर्ष में एक बार डीईसी, एलबेंडाजोल एवं आईवरमेक्टिन जैसी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन आवश्यक है।
मच्छरों से बचाव के लिए घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, जलभराव न होने दें, झाड़ियों की नियमित सफाई करें, रुके हुए पानी में आवश्यकतानुसार एंटी-लार्वा उपाय अपनाएं तथा सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी सीएचओ, बीसीपीएम, चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।












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