कुटीर संस्थान में पत्रकारिता को भी स्थान दिया जाए प्रो० राम मोहन पाठक

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जौनपुर: पंडित अभयजीत दुबे की पावन स्मृति को चिरस्थायी रखने के लिए स्थापित कुटीर संस्थान चक्के जौनपुर के अंतर्गत पत्रकारिता विषय के पठन-पाठन की स्नातक स्तर पर व्यवस्था किए जाने, पंडित जी के नाम से ही एक अखबार कुटीर परिषद से ही प्रकाशित किए जाने, (चाहे वह अख़बार साप्ताहिक या पाक्षिक या मासिक ही क्यों ना हो ), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विशेष ना हो तो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सहयोग लेकर-

सामुदायिक रेडियो द्वारा शिक्षा प्रसार में योगदान करने हेतु – खबरों की प्रसारण व्यवस्था किए जाने के बारे में विचार किया जा रहा है। विमर्श गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि समागम अपने संबोधन में अध्यक्ष पद से विचार व्यक्त करते हुए पूर्व कुलपति प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने यह प्रस्ताव संस्थान के मुखिया एवं चक्के स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधक अजयेंद्र दुबे के सम्मुख रखा। पत्रकारिता संस्थान के लिए प्रोफेसर पाठक ने इसलिए विशेष जोर दिया क्योंकि – संस्थान के संस्थापक पंडित अभिजीत दुबे एक निर्भीक पत्रकार भी थे स्वाधीनता आंदोलन में हुए सेनानी के साथ ही लोक – जागरण हेतु पत्रकारिता क्षेत्र में भी आए।

आजादी की अलख जगाना तथा लोगों को जागृत करने के लिए अखबार निकालकर प्रेरित करना उन दिनों बहुत कठिन काम था। ऐसे वक्त में भी पंडित जी ने संवाद लेखन और संपादन दोनों विद्या में अपना कौशल और उत्साह दिखलाया। वे स्थानीय साप्ताहिक समय से जुड़े हुए थे जो बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह के संपादन में कांग्रेस के मुख्य पात्र के रूप में प्रकाशित हो रहा था। यह जौनपुर के रासमंडल मोहल्ले से निकल रहा था। इसमें लेखन और संपादन करने वाले लोगों को उसे समय की सरकार द्वारा काफी प्रताड़ित किया गया था। वाराणसी से बाबू विष्णु राव पराड़कर के संपादन में प्रकाशित – दैनिक संसार के पंडित जी जिला संवाददाता रहे। वर्ष 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में श्री प्रकाश जी के नेतृत्व में प्रकाशित पूर्वांचल के प्रमुख दैनिक पत्र आज के भी पंडित जी जिला संवाददाता रहे।

लेखन के साथ-साथ पंडित जी ने संवाद संकलन, भाषणों की रिपोर्ट का संकलन व प्रशासन आम जनता की पीड़ा को प्रकाशित एवं प्रसारित करने जैसा दुष्कर कार्य भी रहा । जिला मुख्यालय पर ओलनगंज मोहल्ले से पंडित जी ने साप्ताहिक अखबार विकास का भी प्रकाशन एवं संपादन किया जिसके पुराने अंकों को देखने पर आज के साप्ताहिक उसे पत्र के सम्मुख कहीं नहीं ठहरते न तो संवाद लेखन में न संपादन के न तो भाषा के स्तर पर उनको विकास के साथ रखा जा सकता है। इस समागम में एक प्रस्ताव यह भी आया कि पंडित जी के नाम पर उनकी कृति को अस्थाई प्रदान करने के लिए अच्छा काम करने वाले पत्रकारों के लिए पुरस्कार देने की योजना भी बनाई जाए पत्रकार पंडित अभय जी दुबे जैसे उत्साही और पराक्रमी हो प्रबंधक राजेंद्र दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता के बारे में जो भी प्रस्ताव आया है उसे क्रियान्वित करने के बारे में अवश्य विचार किया जाएगा।

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