आंदोलन ही विकल्प..?
जौनपुर। जिला मुख्यालय पर चाहे आप गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद और मिर्जापुर से प्रवेश करिए या अयोध्या से ही आइये, हर तरफ टूटी सड़के, अतिक्रमण और दोनों तरफ पटरी पर लगी अस्थायी दुकानों के दर्शन होंगे। पूरे शहर में अतिक्रमण और टूटी सड़कों का साम्राज्य दिखलाई पड़ेगा।


जौनपुर मुख्यालय पर निवास करने वाले अधिकारियों, जिले के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंताओं, स्वयं जिलाधिकारी, सीडीओ, नगर मजिस्ट्रेट, नगर पालिका के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की गाड़ियां दौड़ती रहती हैं। यह लोग देख करके भी इस बड़ी समस्या की ओर से आंखें बंद कर लेते हैं। हमारे सत्ता पक्ष और विरोध पक्ष के राजनेताओं ने भी शहर में अपना आशियाना बना रखा है। यह भी इन अधिकारियों के भय या प्रेम वश इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनके लिए अलग से सफाई कर्मी तैनात है। उनके घर के आगे और पिछवाड़े निरंतर सफाई होती रहती है, सड़कों की मरम्मत होती रहती है और चूने का भी छिड़काव भी होता रहता है।

जिलाधिकारी प्रेस के माध्यम से संबंधित अभियंताओं और अधिकारियों को सड़क की मरम्मत के लिए आदेश देते रहते हैं लेकिन उनकी कोई सुनता ही नहीं..?
जिले के प्रभारी मंत्री पता नहीं क्यों हर महीने मुख्यालय पर बैठक करते हैं.?जब कुछ करना ही नहीं है तो आते ही क्यों है.?

अब तो जरूरी है कि यहां भी कोई सशक्त संगठन बनाया जाए ताकि आम जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए आंदोलन चलाया जाए।












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