जौनपुर। कर्मकांड की विधा में मुंबई में मशहूर घनश्याम तिवारी नहीं रहे। उनका हृदय गति रुकने से 6 नंबर 2025 को मुंबई में ही देहावसान हो गया। आपकी अवस्था लगभग 60 वर्ष बताई जाती है। आप पूर्वांचल में मंत्र- तंत्र विशेषज्ञ पंडित सभाजीत तिवारी के सुपुत्र थे और पूजा- पाठ, रुद्राभिषेक, विवाह, महामृत्युंजय, मूल शांति, सत्यनारायण व्रत कथा और मृत्यु पश्चात के तमाम कर्मकांड के संबंध में जानकारी आपको अपने पिता से ही प्राप्त हुई थी। आप जौनपुर जनपद में सरसौडा गांव के निवासी थे।
अपने पीछे घनश्याम तिवारी भरा – पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके अनुज, अनिल और सुनील दिल्ली में रहते हैं। परिवार में इनके ताऊ पंडित राजवीर तिवारी के सुपुत्र सदानंद तिवारी, लालजी तिवारी (अवकाश प्राप्त शिक्षक) खेती-बाड़ी संभालने के साथ ही सामाजिक संबंधों का निर्वाह घर पर ही रहकर कर रहे हैं। अब यही सदानंद तिवारी और लालजी तिवारी पूरे परिवार में अभिभावक की भूमिका निभा रहे हैं।
स्वर्गीय घनश्याम तिवारी का शुद्ध दिनांक 15 नवंबर और त्रयोदसाह 18 नवंबर को सुनिश्चित है।












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