जौनपुर। जिलाधिकारी डॉ०दिनेश चंद्र ने ब्लॉक डोभी के केराकत क्षेत्र स्थित कोटि तीर्थ वराह धाम, रामगढ़ चंदवक पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। गोमती नदी के पावन तट पर आयोजित संत समागम में सहभागिता करते हुए उन्होंने संत समाज का आशीर्वाद प्राप्त किया और इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया।
जिलाधिकारी ने कहा कि संतों के मध्य उपस्थित होना उनके लिए आत्मिक प्रसन्नता का विषय है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने संत समाज के आशीर्वाद को जीवन की दिशा और ऊर्जा का स्रोत बताते हुए कहा कि संतों का सानिध्य व्यक्ति को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि गोमती तट पर आयोजित यह संत समागम सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। संतजन भगवान सूर्य की ऊर्जा से प्रेरणा लेकर गांव-गांव, शहर-शहर और पूरे राष्ट्र में भारतीय संस्कृति की रक्षा हेतु सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने संतों के योगदान को राष्ट्र और समाज के लिए अमूल्य बताते हुए सभी संतों के चरणों में नमन किया।

डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनके निर्देशानुसार जनपद जौनपुर सहित प्रदेश के विभिन्न प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों को चिन्हित कर जीर्णोद्धार एवं विकास के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, जिन पर स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ हो चुका है।
उन्होंने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों में स्थित धार्मिक स्थलों के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और गोमती तट स्थित यह ऐतिहासिक स्थल भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण केंद्र है।
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि प्रयागराज में शिक्षा प्राप्त करने और हरिद्वार से सेवा प्रारंभ करने के दौरान उन्हें विभिन्न अखाड़ों के संतों का आशीर्वाद मिला, जो उनके जीवन की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि जब-जब राष्ट्र और धर्म पर संकट आया, संत समाज ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए संस्कृति की रक्षा की है।
डीएम ने स्पष्ट किया कि ‘धर्म’ केवल किसी मत या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता, समरसता और कल्याण का संदेश देता है। सनातन धर्म सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है और संपूर्ण मानव जाति के कल्याण की कामना करता है। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने संत समाज से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने हेतु मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्रदान करते रहने का आह्वान किया।
इस दौरान उन्होंने उपस्थित संतों एवं वृद्धजनों को अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया और मंदिर परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।












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