‘लकीरों में गांधी’ गांधी के व्यक्तित्व और विचारों को समझने की महत्वपूर्ण कृति

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जौनपुर। डॉ. श्रीप्रकाश पाल की नई पुस्तक ‘लकीरों में गांधी’ के प्रकाशन पर शोधार्थी सिमरन कुमारी ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। अनुज्ञा प्रकाशन से वर्ष 2026 में प्रकाशित यह पुस्तक 100 पृष्ठों की है, जिसमें महात्मा गांधी के व्यक्तित्व, चरित्र, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका तथा भारत की आजादी के लिए उनके संघर्ष को कार्टूनों के माध्यम से प्रभावशाली और शोधपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक पढ़ने के बाद सिमरन कुमारी ने कहा कि उन्हें इस पुस्तक के माध्यम से कार्टून के महत्व को जानने और समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार आमतौर पर कार्टून को देखकर लोगों के मन में हास्य और मनोरंजन का भाव उत्पन्न होता है, लेकिन प्रभावशाली कार्टून अपने भीतर गहरे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक संदेश समेटे होते हैं।

पुस्तक में आजादी से पहले, आजादी के समय और आजादी के बाद की परिस्थितियों को गांधी पर बनाए गए कार्टूनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसमें गांधी से संबंधित अनेक कार्टूनों के ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों का विश्लेषण किया गया है। प्रत्येक कार्टून के संदर्भ, अर्थ और संदेश को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक में प्रमुख रूप से तीन प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट—केशव शंकर पिल्लई, रंगनाथन तथा आर. के. लक्ष्मण—के कार्टूनों का विश्लेषण किया गया है। इन कलाकारों ने गांधी के विचारों और उनके समय की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने व्यंग्यचित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

पुस्तक के पृष्ठ संख्या 27 पर लेखक लिखते हैं कि कार्टून जीवन के लगभग हर पहलू को अभिव्यक्त करते हैं और मुद्रण माध्यम में उनका प्रभाव कई बार समाचार से भी अधिक हो सकता है। कार्टून जटिल विषयों को सहज रूप से समझाने तथा विमर्श को जन्म देने में सक्षम होते हैं। हावभाव, संकेतों, प्रतीकों और पात्रों के संक्षिप्त संवाद के माध्यम से कार्टून लंबी कथा को भी प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।

पुस्तक में गांधी और तत्कालीन राजनीतिक नेताओं तथा वायसराय से जुड़े अनेक कार्टून भी शामिल हैं। पृष्ठ संख्या 72 पर प्रकाशित ‘Who Wants Pakistan?’ शीर्षक वाला कार्टून विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसमें गांधी और जिन्ना को चित्रित किया गया है। पुस्तक में इस कार्टून के माध्यम से उस समय के विभाजन संबंधी राजनीतिक संदर्भ को समझाने का प्रयास किया गया है।

सिमरन कुमारी के अनुसार ‘लकीरों में गांधी’ केवल कार्टूनों का संग्रह नहीं, बल्कि एक गंभीर शोधपरक कृति है। इसमें कार्टून कला की उत्पत्ति, विकास तथा समाज और राष्ट्र-निर्माण में उसकी भूमिका पर भी चर्चा की गई है। पुस्तक में हिंदी की ब्राह्मण, भारत मित्र तथा मतवाला जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित कार्टूनों की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

उन्होंने कहा कि कार्टूनों को विदेशों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है और भारत में भी एनसीईआरटी की पुस्तकों में उन्हें स्थान दिया जा रहा है। इससे कार्टूनों की शैक्षिक और सामाजिक प्रासंगिकता स्पष्ट होती है।

एक पाठक के रूप में सिमरन कुमारी ने कहा कि ‘लकीरों में गांधी’ सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी पुस्तक है। जिस प्रकार नाटक मनोरंजन के माध्यम से जीवन के गंभीर संदेश देता है, उसी प्रकार कार्टून हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों और उनके समय की परिस्थितियों को जीवंत रूप में समझने के लिए यह पुस्तक महत्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति है।

सिमरन कुमारी
शोधार्थी, हिंदी विभाग
राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश

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