अंधा प्रशासन – टूटी सड़के

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टूटी सड़कों और अतिक्रमण से बेहाल जौनपुर, क्या आंदोलन ही बनेगा विकल्प?

जौनपुर। जिला मुख्यालय की बदहाल सड़कों और जगह-जगह फैले अतिक्रमण को लेकर आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि सड़क सुधार को लेकर अधिकारियों की बैठकों और निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों के निर्देशों का पालन धरातल पर क्यों नहीं हो पा रहा है।

बताया जाता है कि बीते दिनों सड़क सुधार के लिए संबंधित जिलाधिकारी ने तीन दिन का समय था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कई स्थानों पर सड़क मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शहर की खराब सड़कों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कहीं बाइक सवार सड़क के गड्ढों के कारण गिर रहे हैं तो कहीं ई-रिक्शा के पलटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके साथ ही सड़कों के किनारे अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों के कारण आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।

जौनपुर शहर में प्रवेश के प्रमुख मार्गों पर भी सड़क की स्थिति और अतिक्रमण को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या की ओर से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर कई जगह सड़क की खराब स्थिति, अतिक्रमण तथा पटरी पर लगी अस्थायी दुकानों से यातायात प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय पर रहने वाले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का आवागमन इन्हीं मार्गों से होता है। इसके बावजूद शहर की सड़कों और अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले निर्देशों का असर जमीन पर दिखाई नहीं देता।

लोगों का यह भी कहना है कि यदि जिलाधिकारी द्वारा संबंधित अभियंताओं और अधिकारियों को सड़क मरम्मत के निर्देश दिए जाते हैं, तो उन निर्देशों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी भी होनी चाहिए। केवल बैठकों और निर्देशों तक सीमित रहने के बजाय क्षतिग्रस्त सड़कों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।

शहरवासियों का कहना है कि सड़क, अतिक्रमण और यातायात जैसी समस्याएं किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि आम जनता से सीधे संबंधित हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को भी इन समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाना चाहिए।

अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर लगातार शिकायतों और निर्देशों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता है, तो क्या नागरिकों को अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जौनपुर शहर की सड़कों और अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान कराने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

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