जौनपुर। जौनपुर प्रीमियर लीग में क्रिकेट खिलाड़ियों के चयन के लिए पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने अपना परिसर दिया है। जहां तक विश्वविद्यालय की क्रिकेट खिलाड़ियों के हित की बात है यह तो उचित कहा जा सकता है लेकिन कई ऐसे कार्य हो रहे हैं जिन्हें छात्रहित में बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। जेपीएल में चयनित छात्र पूर्वांचल विश्वविद्यालय के ही होंगे, ऐसा नहीं है यदि विश्वविद्यालय के छात्र जौनपुर के अधिशासी नहीं है तो उनका चयन जेपीएल में नहीं होगा।

यह आवश्यक नहीं है कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले लड़के जौनपुर जनपद के ही हो, वह बाहर जनपदों के भी हो सकते हैं और हैं भी।

इस जेपीएल में छात्रों के चयन को राजनीति से जुड़े लोग दूसरी निगाह से देख रहे हैं कुछ नेताओं का आरोप है कि इस लीग के संयोजक खिलाड़ियों का चयन 2027 के विधानसभा निर्वाचन को ध्यान में रखकर कर रहे हैं, अन्यथा खिलाड़ियों का चयन विधानसभावार क्यों किया जा रहा हैं। संयोजक की मंशा क्या है यह समझ में नहीं आ रहा है। लगता है वह किसी पार्टी के उम्मीदवार के लिए नौजवानों की फ़ौज तैयार कर रहे हैं, या नए कुलपति को एआई (AI) द्वारा ऊपर से कोई संकेत तो नहीं दिया गया है ?

अखबारों और अन्य माध्यमों को अपने कार्य – व्यवहार से सम्बन्धित दर्जनों प्रेस नोट देने वाले नए कुलपति यह भी नहीं देख रहे हैं कि आवासीय छात्र-छात्राओं का प्रीमियर लीग के सज्जनों द्वारा पठन – पाठन के समय बजाया जा रहा फूहड़ संगीत कितना लाभ दे रहा है ?
इस लीग के चयन के नाम पर कहां क्या हो रहा है इस पर किसी का ध्यान नहीं है, जो आपत्तिजनक है।












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